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किसानो ने किया 8 दिसंबर को भारत बंद का एलान, साहित्यकारों ने लौटाए अवार्ड

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुए किसान आंदोलन के समर्थन में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और शिरोमणि अकाली दल (डेमोक्रेटिक) के प्रमुख और राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींडसा द्वारा पद्म भूषण अवार्ड वापस किये जाने के बाद अब साहित्यकारो और लेखकों ने साहित्य अकादमी अवार्ड वापस करने का एलान किया है।

किसानों के समर्थन में पंजाब के लेखक डॉ. मोहनजीत, चिंतक डॉ. जसविंदर और पत्रकार स्वराजबीर ने अपने साहित्य अकादमी अवॉर्ड लौटा दिए हैं। डॉ. जसविंदर सिंह ने कहा, ‘अगर कोई लेखक लोगों की आवाज़ को प्रस्तुत नहीं कर सकता है तो क्या बात है? मैंने पुरस्कारों के लिए लिखना शुरू नहीं किया था। केंद्र सरकार को किसानों के साथ निर्दयता से पेश आना और बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन करते देखना निराशाजनक है।’

वहीँ दूसरी तरफ सातवें दिन भी किसानो का आंदोलन जारी रहा। कल(शनिवार) एक बार फिर किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच पांचवे दौर की बातचीत होनी है। इस बीच अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के उपाध्यक्ष सुरेंद्र सोलंकी ने यह भी कहा कि उनका संगठन शनिवार को प्रदर्शनकारी किसानों के समर्थन में राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन करेगा।

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8 दिसंबर को भारत बंद का एलान:

किसान संगठनों का कहना है कि यदि कल की बातचीत से भी कोई हल नहीं निकलता और सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती तो 8 दिसंबर को देशव्यापी बंद का आयोजन किया जाएगा। वहीँ इससे पहले कल शनिवार को सांकेतिक रूप से विरोध जताने के लिए किसान संगठनों के कार्यकर्त्ता पीएम मोदी के पुतले दहन करेंगे।

भारतीय किसान यूनियन (लखोवाल) के महासचिव एचएस लखोवाल ने सिंघू बॉर्डर से कहा, कल हमने सरकार से कहा कि कृषि कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए। 5 दिसंबर को देशभर में पीएम मोदी के पुतले जलाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि हमने 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है। वहीं नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि 8 तारीख को भारत बंद होगा।

गौरतलब है कि कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग कर रहे किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच अब तक चार बार बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक की बातचीत बेनतीजा रही है। कल 5 दिसंबर को किसान नेताओं और सरकार के बीच एक बार फिर बातचीत होनी है।

किसान कृषि कानूनों को रद्द करने से कम पर कोई समझौता करने के मूड में नहीं दिख रहे। वहीँ सरकार चाहती है कि इन कानूनों में कुछ संशोधन की संभावनाओं को देखकर रास्ता निकाल लिया जाए।

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