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आपबीती: कोविड –19 से मेरा सामना

ब्यूरो (मोहम्मद ख़ुर्शीद अकरम सोज़)। कोरोना वायरस का संक्रमण दिसंबर 2019 में चीन के वुहान में शुरू हुआ और रफ़्ता-रफ़्ता सारी दुनिया में फैल गया, फिर WHO ने इसे महामारी घोषित कर दिया और कोरोना वायरस के संक्रमण से होने वाली बीमारी को COVID-19 का नाम दिया (COVID-19 is the disease responsible for the virus called SARS-CoV-2 or severe acute respiratory syndrome corona virus 2).

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक़ बुख़ार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ़ इसके मुख्य लक्षण हैं. इसलिए किसी को ऐसा कोई लक्षण महसूस हो तो तुरंत इसकी जाँच करवा कर उपचार करवाना चाहिए क्यूँकि आरंभिक अवस्था में इस पर आसानी से नियंत्रण हो जाता किन्तु थोड़ी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती जैसा कि ख़ुद मेरे साथ हुआ.

दिनांक 30/10/2020 को Duty से लौटने पर मुझे हल्की से खाँसी शुरू हुई, मैं ने इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया. दुसरे दिन 31/10/2020 को S.K.M.S.( AITUC ) संगठन की 100 वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में खदान के हाज़री घर ( Attendance Office ) के पास एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसके संचालन की ज़िम्मेदारी मेरे प्रिय मित्र कॉमरेड विजय अड्डुरवार ने मुझे सौंपी हुई थी .

कार्यक्रम के संचालन के समय मुझे अपनी आवाज़ और अंदाज़ में ऊर्जा की कुछ कमी महसूस हुई . कार्यक्रम के बाद मैं डिस्पेंसरी गया और वहाँ डॉक्टर ऋषिकेश से मुलाक़ात की उन्होंने Oxygen Saturation और Temperature चेक किया जो कि नार्मल ही था ; Oxygen Saturation 97 और Temperature 96.5º F, पल्स रेट भी नार्मल अर्थात 100 से कम ही था. डॉक्टर ऋषिकेश ने कुछ दवाएं दीं लेकिन खाँसी कम नहीं हो रही थी. मैं ने दो दिन रेस्ट किया, लेकिन खाँसी बढ़ ही रही थी. फिर मैं ने 05/11/2020 से Sick Leave ले लिया.

इस बीच मैं डॉ. नूतन और डॉ. ऋषिकेश दोनों के संपर्क में रहा और दोनों ने मुझे C. T. Scan करवाने की सलाह दी यहाँ तक कि 08/11/2020 को जब खाँसी के साथ साँस लेने में भी दुश्वारी होने लगी तो हमारे साथी भाई ज़ियाउल्लाह ख़ान ने हमारी कंपनी के Central Hospital (राजीव रतन अस्पताल, वे.को.लि. वणी क्षेत्र ) से रेफ़्रल (Referral) पेपर बनवा कर शाम के 07:00 बजे कंपनी की एम्बुलेंस से मुझे C. T. Scan के लिए चंद्रपुर भेज दिया. वहाँ मेरा C. T. Scan हुआ और रिपोर्ट मेरे हाथ में आयी जिसके मुताबिक़ मैं Moderate-Severe Viral Pneumonia से पीड़ित था और मेरे दोनों Lungs 60% – 70% तक इससे प्रभावित थे.

अल्लाह पाक का शुक्र है कि इतनी गंभीर ( Serious ) रिपोर्ट रहने के बा-वजूद मैं ज़रा भी विचलित नहीं हुआ और बिल्कुल इत्मिनान के साथ रिपोर्ट लेकर राजीव रतन अस्पताल पहुँचा, तब तक रात के दस बज चुके थे . चंद्रपुर से निकलते समय मैं ने ज़ियाउल्लाह भाई को मोबाइल पर C. T. Scan की रिपोर्ट बता दी थी और वह WOCKHARDT हॉस्पिटल, नागपुर भेजने के process में लग गए थे.

मेरे पहुँचते ही Emergency Duty में तैनात डॉ. विनीता ने Referral Paper बनाया और मुझे एम्बुलेंस से WOCKHARDT हॉस्पिटल नागपुर के लिए रवाना करने का प्रबंध किया गया . उस समय ज़ियाउल्लाह भाई के अलावा कॉम. विजय अड्डुरवार, भाई ग़ुलाम जिलानी और कुछ अन्य साथी वहाँ मौजूद थे और मेरे प्रति उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें मुझे साफ़ दिखाई दे रही थीं लेकिन मैं अल्लाह के फ़ज़़्लो-करम से बिल्कुल मुतमइन था. मैं ने फ़ोन करके शरीक-ए-हयात सय्यदा नुज़हत जहाँ को ख़बर दी कि,“ मुझे WOCKHARDT हॉस्पिटल नागपुर रेफ़र किया गया है, मैं वहाँ के लिए रवाना हो रहा हूँ. घबराने की बात नहीं, अल्लाह का ज़िक्र और दुआ करती रहिये… और शेख़पुरा में अम्मी को ख़बर कर दीजिये !”

09 / 11 / 2020 को भोर के 04:00 बजे मेरी एम्बुलेंस WOCKHARDT हॉस्पिटल, नागपुर के COVID सेंटर पर पहुँच गयी. डॉ. लोखेंद्र मिश्र PPE किट पहने हुए अपनी एमर्जेंसी टीम के साथ Wheel chair लेकर मेरे पास आये और मुझे Wheel chair पर बैठने के लिए कहा. मैं ने कहा, “ मैं अपने पाँव पर चलसकता हूँ .” डॉ. लोखेंद्र ने कहा आप का Will power बढ़िया है, लेकिन अब हमें आपकी केयर करनी है.” फिर मैं Wheel chair पर बैठ गया. संगीता सिस्टर ने Oximeter से मेरा Oxygen Saturation और Pulse चेक किया जो नार्मल नहीं था फिर मुझे ऑक्सीजन लगा कर वहाँ से मूव किया गया और Emergency Observation Room में ले जाया गया जहाँ लग-भग 02 घण्टे तक मुझे Keen Observation में रखकर मेरी रिपोर्ट टीम हेड डॉ. निर्मल जयसवाल को भेजी गई फिर उनके निर्देश पर मुझे ICCU वार्ड में शिफ़्ट किया गया.

लगभग 03 घण्टे के बाद मुझ से पूछा गया कि मैं कैसा फ़ील कर रहा हूँ ? मेरा जवाब था, “ बहुत बेहतर !” फिर 02 घंटे बाद डॉ. निर्मल जयसवाल ने ख़ुद मेरी ख़ैरियत दर्याफ़्त की. मैं ने जवाब दिया , “By the grace of Almighty and so nice as well as sincere caring of your team I am feeling well and every passing moment is better than the moment which has been passed.” डॉ. जयसवाल मेरे जवाब से बहुत ख़ुश हुए और कहा कि यह आप का विल-पावर है जो आप इतनी तेज़ी से रिकवर हो रहे हैं. मैंने मुस्कुराकर कहा, हाँ Sir, यह Almighty God (सर्वशक्तिमान ईश्वर) का अहसान है.

फिर डॉ. जयसवाल के निर्देश पर मुझे ICCU से निकाल कर Special Monitoring वार्ड में शिफ़्ट किया गया. चंद दिनों बाद Normal Monitoring Ward में रखा गया, जहाँ पहुँचने के बाद मैं ने नागपूर के अपने साथियों भाई अल्ताफ़ ख़ान, भाई सय्यद मुजीब (मुख्य संपादक, लोकमंच वक्ता ) और जनाब ग़ुलाम क़ादिर ( Rtd. General Manager, W C L) से संपर्क कर कुछ किताबें लाने की फ़रमाइश की. भाई सय्यद मुजीब मेरी गुज़ारिश पर “सालिहा बुक स्टाल” गए और वहाँ से मेरे लिए “अल-शिफ़ा डाइजेस्ट” के कुछ शुमारे लेकर अस्पताल आये जिसे Security गार्ड ने उनसे लेकर मेरे बेड तक पहुँचा दिया . इसी तरह जनाब क़ादिर साहिब ने अबू आमिना बिलाल फ़िलिप्स की किताब “The Fundamentals of Tawheed : Islamc Monotheism” भिजवाई .

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”अल-शिफ़ा डाइजेस्ट” एक ख़ास मे’यारी तिब्बी और दीनी माहनामा है जिसके मुताला से न सिर्फ़ तिब्ब-ओ-सेहत से सम्बंधित मुफ़ीद मालूमात हासिल होती हैं बल्कि दीनी मालूमात में भी इज़ाफ़ा होता है . उर्दू से ताल्लुक़ रखने वालों को इसका ख़रीदार ज़रूर बनना चाहिए. अबू आमिना बिलाल फ़िलिप्स की किताब “The Fundamentals of Tawheed : Islamc Monotheism” में इस्लामी तौहीद ( एकेश्वरवाद ) पर सैर-हासिल गुफ़्तगू की गई है.

200 सफ़हात पर मुश्तमिल इस किताब के मुताला से मेरे ईमान की तजदीद हुई. इस तरह WOCKHARDT अस्पताल में मेरा ज़्यादा वक़्त मुताल’अे में ही गुज़रा. इसके साथ ही डॉक्टर्स, नर्सेज़, और House Keeping Staffs के साथ Interaction का सिलसिला भी जारी रहा. बहुत ही शानदार Team Mangement है इस अस्पताल की.

डॉ. निर्मल जयसवाल के Medical Supervision में मेरा इलाज चल रहा था और इनकी टीम के जो डॉक्टर्स लगातार मेरे Health-Status को Observe कर रहे थे उनमें शामिल हैं ; 1) डॉक्टर लोखेंद्र मिश्र, 2) डॉक्टर अर्शिया क़ुरेशी, 3) डॉक्टर निशांत बावनकुले, 4) डॉक्टर सीमा जाधव, 5) डॉक्टर नामदेव सचिन, 6) डॉक्टर सुमीत तितरे, 7) डॉक्टर पंकज , 8) डॉक्टर संजय 9) डॉक्टर पियूष, 10) डॉक्टर अंकित धवळ ..… एंव अन्य…

मैंने डॉक्टरों से पूछा कि जब COVID-19 का इलाज ही नहीं है तो फिर आपलोग इसके मरीज़ों का इलाज कैसे करते हैं ? उन्होंने बड़ी ख़ास बात बताई : नार्मल या वाइरल Flu केजो Symptoms हैं वही COVID-19 के हैं. अगर कोई शख्स Covid Positive है और उसके lungs प्रभावित नहीं हुए हैं तो इलाज और Recovery में कुछ विशेष दिक्क़त नहीं होती .अगर lungs प्रभावित होते हैं और निमोनिया हो जाता है तो मामला गंभीर हो जाता और इलाज इस बात परनिर्भर करता है कि इसकी Severity कितनी है जिसके अनुसार 03 से 07 तक Remdesivir का Dose दिया जाता है इसके अतिरिक्त खून को पतला करने वाली दवाएं , कुछ Antibiotics , Immunity Boosters , और Vitamins की गोलियों के जरिया उपचार करके Recover करने की कोशिश की जाती है.

कुछ कुछ विशेष परिस्थितियों में Plazma दिया जाता जाता है. अतिगम्भीर हालत में मरीज़ को Ventilator पर भेजना पड़ता है .मेरे इलाज में निम्नलिखित दवाओं का प्रयोग किया गया :

1) Remdesivir Injection, 2) Solu-Medrol Injection, 3) Tazar Injection, 4) Clexana Injection,
5) Mucinac-600 Tabs. 6) Citravit-XT Tabs, 7) Limcee Tabs, 8) Methylene Blue Neb, 9) Micomix Neb,
10) Resvas Cough Syrup etc.
Remdesivir का 07 इंजेक्शन मुकम्मल होने के बाद भी मेरा Oxygen Saturation स्थिर नहीं हो पा रहा था बल्कि 90% से 98 % के बीच Fluctuate कर रहा था और कभी-कभी 90 % से नीचे भी जा रहा था .

इलाज के साथ-साथ दुआओं और सदक़ात का सिलसिला जारी था . अम्मी तहज्जुद से ले कर इशा तक हर वक़्त दुआओं में मसरूफ़ थीं, शरीक-ए-हयात और फ़र्ज़ंद अरजुमंद मोहम्मद शिकेब अकरम भी बारगाह-ए-इलाही में मेरी शिफ़ायाबी के लिये फ़र्याद कर रहे थे. मैं रोज़ाना तक़रीबन 03:00 am को उठकर सबसे पहले अस्पताल के समस्त डॉक्टर्स , नर्सींग स्टाफ और हाउस कीपिंग स्टाफ के लिये दुआ करता जो वाक़ई Frontline Covid-19 Warrior हैं और अपनी जान हथेली पर रखकर कोविड-19 के मारीज़ों के इलाज और देखभाल में व्यस्त हैं. अपने लिये मैं अल्लाह रबबूल-इज़्ज़त से हदीस के इन अल्फ़ाज़ में दुआयें करता :-

بِسْمِ اللهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ
أعوذ بعزة الله وقدرته من شر ما أجد وأحاذر
Dua: Audhu bi izzati ‘Llahi wa qudratihi min sharri ma ajidu wa uhadhir(u)
Meaning: I seek refuge in the might and power of Allah, from the evil of the pain I feel and fear. ( Saheeh Muslim)
اللَّهُمَّ رَبَّ النَّاسِ أَذْهِبْ الْبَاسَ اشْفِهِ وَأَنْتَ الشَّافِي لَا شِفَاءَ إِلَّا شِفَاؤُكَ شِفَاءً لَا يُغَادِرُ سَقَمًا
Dua: Allahumma Rabban-nas, az-hibil-ba’sa, washfi Antash-Shafi, la shifa’a il-la shifa ook, shifa’an la yu-ghadiru saqamaa
Meaning: “O Allah take away the hardship, O Lord of mankind, give shifa, You are the One who cures, there is no cure except Your shifa, a cure that will not leave any sickness.”
(Saheeh Bukharee & Saheeh Muslim)

22/11/2020 को डॉ. निर्मल जयसवाल ने मुझ से मेरी हालत पूछी तो मैं ने कहा कि मैं तो बिल्कुल ठीक महसूस कर रहा हूँ लेकिन जबतक Oxygen Saturation 95 % या इस से ज़्यादा पर स्थिर नहीं होता है मैं अस्पताल से डिस्चार्ज लेना उचित नहीं समझता. फिर 30/11/2020 को मेरा Oxygen Saturation 98% तक पहुँच गया और मेरा डिस्चार्ज प्रॉसेस शुरू हुआ. लगभग 09:00 pm को मेरा डिस्चार्ज-पत्र मुझे दिया गया. अस्पताल छोड़ने के क़बल मैंने एक फ़ीड-बैक लिखा जोकि इस प्रकार है :

First of all, I pay thanks to Almighty God by the grace of whom I got admitted in one of the most prestigious hospitals of Central India i.e. WOCKHARDT HOSPITAL, Nagpur in serious condition with severe pneumonia associated with COVID-19 at about 04:00 AM on the 13th of November 2020. As soon as my ambulance reached Emergency Gate the Emergency Team of the hospital took me immediately to the Emergency Ward and my treatment got started under efficient supervision/guidance of Dr. Nirmal Jaiswal, the Expert Physician/Renowned Virologist. Under very efficient guidance/medical supervision of Dr. Jaiswal, only within a few hours my condition became normal from worst condition. So I am highly obliged to Dr. Jaiswal and his team of Doctors and paramedical staff for their very sincere and serious efforts full of love, affection and caring due to which by the grace of Almighty, now I am in a position to return home in very nice condition. Further, I would like to appreciate each and every member of the housekeeping team for their dedication to keep ward neat and clean and providing tasty, healthy and nutritious food. Thanks to WOCKHARD for providing such superfine medical care.

जिन Nursing Staffs ने लगातार मेरी देखभाल की उनमें शामिल हैं :
1) सिस्टर संगीता, 2) सिस्टर कशिश, 3) सिस्टर रौशनी, 4) सिस्टर त्रिशा, 5) सिस्टर रीना, 6) सिस्टर प्रज्ञा, 7) ब्रदर मुन्ना यदुवंशी (M.Sc. Nursing), 8) ब्रदर रविन्द्र तोड़से, 9) ब्रदर नवीन 10) सिस्टर स्नेहा और 11) सिस्टर हर्षा

House Keeping टीम के मेम्बरों में शामिल हैं: 1) श्री शैलेश चंद्रशेखर बागुल , 2) श्री विशाल , 3) श्री शरद, 4) सुश्री सीमा, 5) श्री विक्की , 6) श्री सुजीत राउत, 7) सुश्री पपीता, 8) सुश्री जयाश्री पाटिल, 9) सुश्री नेहा, 10) सुश्री शुभांगी, 11) श्री सूरज , 12 ) सुश्री इन्द्रकला & 13) श्री विक्रम

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कई मरीज़ जो मेरे वार्ड में आये और जिनसे एक अच्छा सम्बन्ध बना उनमें शामिल हैं :- 1) श्री आर . पी . तिवारी लाला, 2) श्री प्रमोद पाटिल, 3) श्री सुधाकर मसराम, 4) श्री विजय नरखेड़े, 5) श्रीमती पल्लवी नरखेड़े, 6) श्री प्रेम कुमार सूर्यवंशी, 7) श्री ललित कुमार सूर्यवंशी, और 8) संध्या दीदी ….

हमारे Mine की Ambulance मुझे लेने पहुँच गई थी. अस्पताल के गेट पर भाई अल्ताफ़ ख़ान भी मौजूद थे. थोड़ी देर उनसे गुफ़्तगू हुई फिर मैं उन से रुख़्सत हो कर अपने निवास-स्थान, कैलाश नगर के लिए प्रस्थान कर गया. Ambulance के ड्राइवर मेरे अज़ीज़ पियूष निकुरे थे. बड़ी अच्छी ड्राइविंग है उनकी. उन्हों ने गाड़ी में Music System को ऑन कर दिया और रात के सन्नाटे में हाईवे पर पियूष बाबू एम्बुलेंस को तेज़ लेकिन नियंत्रित रफ़्तार से ड्राइव करने लगे.

मैंने एक ढाबे पर एम्बुलेंस रुकवा कर उनसे खाना खाने की गुज़ारिश . खाने के बाद फिर उसी रफ़्तार से हमलोग अपनी मंज़िल की ओर निकल पड़े. तारीख़ बदल कर 01 दिसंबर हो चुकी थी . तकरीबन 02:30 am को हम लोग घुगगुस पहुँचे जहाँ ज़िया भाई मुलाक़ात के लिये मुंतज़िर थे, चंद मिनट की एक जज़बाती मुलाक़ात के बाद उनसे रुख़्सत हो कर तक़रीबन 03:30 am बजे अपनी कॉलोनी में दाख़िल हुआ और चंद लम्हों में अपने क्वार्टर के गेट पर. शरीक-ए-हयात सय्यदा नुज़हत ने दरवाज़ा खोला और अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए मेरा इस्तक़बाल किया. उनहों घर को यूँ सजाया था जैसे कोई मेहमान आने वाला हो!

मेरी बीमारी की वजह से उनके चेहरे पर चिंता और डिप्रेशन की लकीरें स्पष्ट दिखाई दे रही थीं . मैं ने सबसे पहले ग़ुसुल करके शूकराने की नमाज़ अदा की . फिर थोड़ी ही देर में फ़ज्र की नमाज़ का वक़्त हो गया और मैं ने फ़ज्र की नमाज़ अदा की फिर दुआ से फ़ारिग़ हो कर सूरह अल-बक़रा की तिलावत शुरू की और जब इसकी आयात – 56 पर पहुँचा तो दिल लरज़ गया ; ( ثُمَّ بَعَثۡنَٰكُم مِّنۢ بَعۡدِ مَوۡتِكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تَشۡكُرُونَ ) “फिर हमने तुम्हे ज़िंदा किया, तुम्हारी मौत के बाद ताकि तुम शुक्र अदा करो.”

यक़ीनन अल्लाह रब्बुल-इज़्ज़त ने मौत के मुँह से मुझे निकाल कर एक नई ज़िंदगी बख्शी थी. बे-इख्तियार सजदे में गिर गया और अल्लाह का शुक्र अदा किया.

सुबह नाश्ते से फ़ारिग़ हो कर अपनी कंपनी WCL के PRO श्री सत्येन्द्र सिंह को एक पत्र लिखा जिसमें अपनी कंपनी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की जिसकी बदौलत WOCKHARDT Hospital में मेरा उपचार हुआ . श्री सत्येन्द्र सिंह ने मेरा पत्र पढ़ने के बाद मुझे निर्देश दिया कि मैं इसे WCL के Official FB page पर डाल दूँ . मैं ने उनके निर्देश का पालन करते हुए इसे WCL के Official FB page पर पोस्ट कर दिया जो कि कुछ इस तरह है:

Huge Thanks to Our Company: Western Coalfield Limited (WCL)
Since 08/11/2020, I had been suffering from Viral Pneumonia associated with COVID-19 and was under treatment in WOCKHARDT Hospital, Nagpur, so I missed to bid my friends Greetings of Deepavali! Now, by the grace of Almighty God, I have been completely cured and have entered in my quarter today on 01/12/2020 at about 03:00 am. Thanks a lot to Our Company Western Coalfields Limited (WCL) for providing such an Excellent Medical Facility of International Standards to its Employees. I have no words to pay my gratitude to our Company WCL, I can only pray for its continual growth and for this each and every member of WCL family will have to work harder with devotion not only for upliftment of the Company but also to secure such excellent facilities!
https://www.facebook.com/groups/238120150075623/permalink/771306380090328/.

शासकीय निर्देशानुसार अस्पताल से आने के बाद 14 तक Quarantine और शरीक-ए-हयात की ख्वाहिश का एहतराम करते हुए मज़ीद 07 दिनों तक घर में आराम करने के बाद मैं 21/12/2020 को अपनी ड्यूटी जॉइन( Join ) कर ली और अब ब-फ़ज़लिही तआला मैं बिल्कुल सेहत मंद हूँ .

मुखतलिफ़ इहतियाती तदबीर ( Preventive Measures) का सख्ती से पालन करने के साथ-साथ Immune System को मज़बूत रखने के लिये मैं Saffola का IMMUNIVEDA KADHA MIX खुद भी उपयोग कर रहा हूँ और परिवार के सभी लोगों और दोस्तों को उपयोग करने की सलाह दे रहा हूँ, इसके अतिरिक्त मैं हमदर्द का इकसीर-ए-सुआल भी उपयोग कर रहा हूँ क्यूंकि Viral Pneumonia से मेरे दोनों Lungs 60 % – 70 % तक प्रभावित हो गए थे और इकसीर-ए-सुआल Lungs को मज़बूत रखने के लिये एक पुर-असर दवा है .

मेरे अस्पताल में क़याम के दौरान भाई सुहैल ख़ान और उनकी अहलिया फ़रहत जबीन ; भाई मंसूर ख़ान और उनकी अहलिया जबीन नाज़ ने मेरी शरीक-ए-हयात सय्यदा नुज़हत जहाँ का खुसुसी ख्याल रखा, इनके अतिरक्त जोगी भाभी, दरने मैडम, अर्पणा दीदी और .. भी नुज़हत की दिलजोई करती रहीं , हमारे खान प्रबंधक जनाब आर. डी . गिल ,मेरे अज़ीज़ खनन पर्यवेक्षक शिवप्रसाद प्रजापति, कार्मिक प्रबंधक रॉबिन चटर्जी , वरिष्ठ प्रबंधक श्री प्रकाश नाईक, उपप्रबंधक मेरे अज़ीज़ रंजीत सिंह भाटी, सामाजिक कार्यकर्ता राजू यादव और जावेद ख़ान लगातार हमारी हौसला अफ़ज़ाई करते रहे. हमारे महाप्रबंधक (खनन) / यूनिट हेड श्री एस. जी .वैरागड़े और खान सुरक्षा अधिकारी श्री जयपाल रेड्डी भी लगातार मेरी ख़ैरियत दर्याफ़्त करते रहे . मैं इन सभी का तह-ए- दिल से शुक्रगुजार हूँ.

अंत में मैं सभी साथियों से कहना चाहूँगा कि कोल-इण्डिया की सेवा देश की Essential Services में शामिल है और इसके सभी एम्पलाइज़ विशेष रूप से जो लोग माइन में ProductionTeam से जुड़े हुए हैं, Frontline Warrior हैं. कार्य के दौरान Social Distancing तो मेनटेन करना संभव नहीं किन्तु मास्क और सैनिटाइज़र का उपयोग अवश्य करें.

सारी सावधानियों के बावुजूद यदि COVID-19 से सामना हो ही जाये तो घबराना नहीं है , ईश्वर पर दृढ़ विश्वास रखते हुए पेशेंस के साथ इसका सामना करना है और हमारी कंपनी कोल इण्डिया हमें बेहतरीन इलाज उपलब्ध कराने में सक्षम है. और चलते-चलते मेरा एक शेर:

मैंने कब दुआ मांगी , दुःख न हो कोई मुझको
दुःख जो दे तो सहने का हौस्ला भी दे या रब !

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