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हाथरस: न्याय मिलने तक अस्थि विसर्जन नहीं करेगा परिवार

नई दिल्ली। हाथरस मामले में हाईकोर्ट में हुई सुनवाई में भाग लेकर देर रात वापस लौटे पीड़ित परिवार का कहना है कि वह न्याय मिलने तक अस्थियां विसर्जित नहीं करेगा।

इससे पहले कल हाईकोर्ट की बैच में हुई सुनवाई में भाग लेने के बाद पीड़ित परिवार यूपी पुलिस की सुरक्षा में लखनऊ से करीब रात 11 बजे वापस हाथरस लौट आया। पीड़िता के परिवार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने अदालत को बताया कि उनकी बेटी के शव को बिना उनकी इजाजत के जलाया गया था।

पीड़ित परिवार ने कहा कि इस मामले में जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता है वे पीड़िता की अस्थियां विसर्जित नहीं करेंगे। परिवार का कहना है कि वे आज भी भय के साये में जी रहे हैं और उन्हें अपनी सुरक्षा का खतरा बना हुआ है।

कोर्ट की एडीजी को कड़ी फटकार:

हाथरस की घटना पर इलाहबाद हाईकोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लिए जाने के बाद इस मामले में सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) को कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई।

कोर्ट ने एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार से कहा कि अगर आपकी बेटी होती तो क्या आप बिना देखे अंतिम संस्कार होने देते? एडीजी लॉ एंड ऑर्डर कोर्ट के इस सवाल पर चुप हो गए।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष की वकील सीमा कुशवाहा ने एडीजी को रेप की परिभाषा पढ़ने की सलाह दी और कहा कि मेरे पास सारी रिपोर्ट आ चुकी है। सुनवाई के दौरान हाथरस के डीएम को लेकर पीड़िता की भाभी ने कोर्ट को बताया कि इन्होंने कहा था कि अगर आपकी बेटी कोरोना से मर जाती तो आपको इतना मुआवजा नहीं मिलता।

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