देश बड़ी खबर

तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने वाले प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय केबिनेट की बैठक में तीनो कृषि कानून वापस लिए जाने के प्रस्ताव मंजूरी दे दी गई है। गौरतलब है कि शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश में तीनो कृषि कानून वापस लेने का एलान किया था।

आज केबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि आज कैबिनेट बैठक में कृषि क़ानूनों को औपचारिक रूप से वापस लेने का निर्णय लिया गया है। अगले हफ्ते में पार्लियामेंट की कार्यवाही शुरू होगी वहां पर दोनों सदनों में कृषि क़ानूनों को वापस लेने की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।

कैसे खत्म होंगे तीनो कृषि कानून:

संसदीय नियमों के मुताबिक किसी भी पुराने कानून को वापस लेने की भी वही प्रक्रिया है जो किसी नए कानून को बनाने की है। जिस तरह से कोई नया कानून बनाने के लिए संसद के दोनों सदनों से बिल पारित करवाना पड़ता है ठीक उसी तरह पुराने कानून को वापस लेने या समाप्त करने के लिए संसद के दोनों सदनों से बिल पारित करवाना पड़ता है।

ये भी पढ़ें:  वरुण गांधी का सरकार पर निशाना 'पहले तो सरकारी नौकरी ही नहीं है, फिर भी कुछ मौका आए तो..."

29 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा या राज्यसभा में तीन कानूनों के लिए या तो तीन अलग-अलग या फिर तीनों के लिए एक ही बिल पेश किया जाएगा। पेश होने के बाद चर्चा या बिना चर्चा के बिल पहले एक सदन से और फिर दूसरे सदन से पारित होने के बाद मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही तीनों कृषि कानून निरस्त हो जाएंगे। बिल पारित होने में कितना समय लगेगा ये सरकार की प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा।

एमएसपी गारंटी के लिए कानून पर अड़े हैं किसान:

वहीँ दूसरी तरफ भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि ये आंदोलन अभी ख़त्म नहीं होगा। 27 नवंबर को हमारी बैठक है जिसके बाद हम आगे के निर्णय लेंगे।

टिकैत ने कहा कि मोदी जी ने कहा है कि 1 जनवरी से किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाएगी तो हम पूछेंगे कि कैसे दोगुनी होगी। किसानों की जीत तब होगी जब उन्हें अपनी फसलों के दाम मिल जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को फसलों का नुकसान हुआ है और MSP की ज़िम्मेदारी कौन लेगा? MSP पर पक्का गारंटी कार्ड लेकर जाएंगे।

किसान नेता ने कहा कि सरकार ने घोषणा की है तो वो प्रस्ताव ला सकते हैं लेकिन MSP और 700 किसनों की मृत्यु भी हमारा मुद्दा है। सरकार को इसपर भी बात करनी चाहिए। 26 जनवरी से पहले तक अगर सरकार मान जाएगी तो हम चले जाएंगे। चुनाव के विषय में हम चुनाव आचार संहिता लगने के बाद बताएंगे।

अपनी राय कमेंट बॉक्स में दें
सत्य को ज़िंदा रखने की इस मुहिम में आपका सहयोग बेहद ज़रूरी है। आपसे मिली सहयोग राशि हमारे लिए संजीवनी का कार्य करेगी और हमे इस मार्ग पर निरंतर चलने के लिए प्रेरित करेगी। याद रखिये ! सत्य विचलित हो सकता है पराजित नहीं।
ताज़ा हिंदी समाचार और उनसे जुड़े अपडेट हासिल करने के लिए फ्री मोबाइल एप डाउनलोड करें अथवा हमें फेसबुक, ट्विटर या गूगल पर फॉलो करें