पड़ताल बड़ी खबर

तब्लीगी जमात को लेकर न्यूज़ चैनलों पर दिखाई गईं ये दो खबरें निकलीं झूठीं

नई दिल्ली। निजामुद्दीन मर्कज़ प्रकरण का मामला सामने आने के बाद कई राज्यों में उन लोगों की कोरोना जांच चल रही हैं जिन्होंने तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।

दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात से लेकर असम,पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत के कर्नाटक,केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में उन लोगों की पहचान की गई है जो दिल्ली के निजामुद्दीन मर्कज़ में आयोजित तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए तब्लीगी जमात के लोगों का कोरोना टेस्ट किया जा रहा है तथा पॉजिटिव पाए जाने पर उन्हें क्वारंटाइन किया जा रहा है।

इस बीच देश के कई चैनलों ने टीआरपी बटोलने के लिए तब्लीगी जमात से जुड़े लोगों को लेकर फ़र्ज़ी खबरें भी दिखाईं। इनमे ख़बरें अभी तक फ़र्ज़ी साबित हो चुकी हैं।

चैनलों पर दिखाई गई एक खबर में दावा किया गया कि सहारनपुर में क्वारंटाइन किये गए तब्लीगी जमात के लोग डॉक्टरों से दुर्व्यवहार कर रहे हैं। इतना ही नहीं खबर में दावा किया गया कि क्वारंटाइन में तब्लीगी जमात से जुड़े लोग नॉन वेज खाने की मांग को लेकर हंगामा कर रहे हैं और जमातियों ने खुले में ही शौच कर दिया है।

ये भी पढ़ें:  गांधी-सावरकर टिप्पणी पर जयराम रमेश और ओवैसी ने राजनाथ को घेरा

यह खबर प्रकाश में आने के बाद सहारनपुर पुलिस ने इस खबर की सत्यता को जांचने के लिए थाना प्रभारी रामपुर मनिहारन को निर्देशित किया था। जांच में पाया गया कि सोशल मीडिया, समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों पर सहारनपुर में जमातियों द्वारा नॉन वेज खाने की मांग को लेकर हंगामा और खुले करने की खबर सत्यता से परे हैं। इस तरह की कोई घटना सहारनपुर में नहीं हुई है।

वहीँ एक अन्य खबर ज़ी न्यूज़ उत्तर प्रदेश की तरफ से ट्वीट की गई। इसमें दावा किया गया था कि उत्तर प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद में तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए कोरोना पॉजिटिव लोगों को लेने गई मेडिकल टीम पर पथराव किया गया।

फ़िरोज़ाबाद पुलिस ने न सिर्फ इस तरह की कोई घटना होने से इंकार किया बल्कि ज़ी न्यूज़ उत्तर प्रदेश से ट्वीट भी डिलीट करवाया। फिलहाल ज़ी न्यूज़ उत्तर प्रदेश ने यह ट्वीट डिलीट कर दिया है।

तब्लीगी जमात से जुडी खबरों को तोड़मरोड़ कर नई शक्ल देने की कोशिश अभी भी जारी है। कुछ चुनिंदा अख़बार और न्यूज़ चैनल तब्लीगी जमात के लोगों की कोरोना जांच को लेकर क्वारंटाइन किये गए लोगों से जुडी खबरों को प्रमुखता देने के कारण कई अन्य आवश्यक खबरों को नहीं दिखा रहे। सुदर्शन टीवी ने तो बाकायदा एक अभियान छेड़ रखा है। कई बार इस चैनल की खबरें सच्चाई की कसौटी पर झूठी साबित हुई हैं।

अपनी राय कमेंट बॉक्स में दें
सत्य को ज़िंदा रखने की इस मुहिम में आपका सहयोग बेहद ज़रूरी है। आपसे मिली सहयोग राशि हमारे लिए संजीवनी का कार्य करेगी और हमे इस मार्ग पर निरंतर चलने के लिए प्रेरित करेगी। याद रखिये ! सत्य विचलित हो सकता है पराजित नहीं।
ताज़ा हिंदी समाचार और उनसे जुड़े अपडेट हासिल करने के लिए फ्री मोबाइल एप डाउनलोड करें अथवा हमें फेसबुक, ट्विटर या गूगल पर फॉलो करें