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विचार: आखिर वास्तुदोष युक्त रुपये का सिंबल देश की अर्थनीति को ले डूबा

नई दिल्ली। भारत सरकार के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा चालू वित्त वर्ष-2020-21 की अप्रैल-जून तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सर्वकालीन 23.9 प्रतिशत की गिरावट की घोषणा ने एक बार फिर रुपये के सिंबल में वास्तु दोष की पूर्वोत्तर के वास्तु सलाहकार राजकुमार झाँझरी की भविष्यवाणी को सच साबित कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भारतीय मुद्रा रुपये का नया सिंबल जारी किया गया था। उसके बाद से ही दिन दूनी, रात चौगुनी प्रगति कर रही देश की अर्थव्यवस्था अंग्रेजी वर्णमाला के ‘यूÓ वर्ण की तरह मोड़ लेते हुए लगातार निम्नगामी होती जा रही है।

विगत 25 सालों में पूर्वोत्तर के 16,000 परिवारों को नि:शुल्क वास्तु सलाह देकर उनका जीवन सुधारने वाले वास्तु विशेषज्ञ राजकुमार झाँझरी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के साथ ही वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी पत्र लिखकर रुपये के सिंबल में भयंकर वास्तु दोष का जिक्र करते हुए इससे देश की अर्थनीति को नुकशान पहुँचने व डॉलर के मुकाबले रुपये की दर में भारी गिरावट की भविष्यवाणी करने के साथ ही रुपये के सिंबल को वास्तु सम्मत बनाने की कई दफे अपील भी की थी। लेकिन दोनों ही प्रधानमंत्रियों द्वारा मामले की अनदेखी किये जाने के फलस्वरूप देश की अर्थनीति की भयंकर दुर्दशा की बात खुद भारत सरकार के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के सोमवार को जारी किये गये तथ्यों के जरिये सत्य प्रमाणित कर दिया है। रुपये के प्रतीक को रद्द कर वास्तु अनुकूल करने की मांग में वास्तु सलाहकार राजकुमार झांझरी ने गुवाहाटी में एक दिन का अनशन भी किया था, लेकिन फिर भी केंद्र सरकार के सिर में जूं नहीं रेंगी।

स्मरणीय है कि रुपये के सिंबल को लागू करने के पूर्व देश की विकास दर 8.5 प्रतिशत थी, जो रुपये के सिंबल के लागू होने के बाद लगातार गिरते हुए अब 23.9 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट के साथ विश्व की सबसे खस्ताहाल अर्थनीति के रूप में अपनी दुर्दशा को बयां कर रही है। विगत जनवरी-मार्च तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में 3.1 फीसदी की वृद्धि देखी गई थी, जो रुपये के सिंबल को लागू करने के बाद आठ साल में सबसे कम थी।

उल्लेखनीय है कि देश की आजादी के वक्त एक डॉलर एक रुपये के बराबर था। देश की आजादी के बाद 65 सालों में रुपया 44 प्रति डॉलर तक ही गिरा था, जबकि रुपये के सिंबल के लागू होने के बाद 2011 से 2020 तक सिर्फ 9 सालों में 32 रुपये की भयंकर गिरावट के साथ 76 रुपये के आंकड़े को छू चुका है। मोदी के राज में भी सन् 2018 में सिर्फ एक ही वित्त वर्ष में डॉलर के मुकाबले रुपया 13 प्रतिशत गिर गया था।

वास्तु विशेषज्ञ राजकुमार झाँझरी का कहना है कि वास्तु के नियमानुसार किसी भी घर का निर्माण चारों दिशाओं को बरकरार रखते हुए चौकोर होना चाहिए और उसका कोई भी कोना कटा नहीं होना चाहिए। विशेषकर जिस किसी भी घर का उत्तर-पूर्व का कोना कटा होता है, वो भयंकर वास्तु दोष होता है तथा उस घर में रहने वालों को तबाह कर देता है। चूंकि उत्तर और पूर्व दोनों ही दिशाएं पॉजिटिव दिशाएं हैं, अत: इन दोनों कोणों का कटना परिवार की उन्नति, समृद्धि की लाईफ लाईन के कटने सरीखा खतरनाक होता है। वास्तु में गृह की चहारदीवारी में एक वास्तु पुरुष की कल्पना की गई है, जिनका सिर उत्तर-पूर्व में तथा पांव दक्षिण-पश्चिम में होते हैं। जब कोई घर का उत्तर-पूर्व का कोना काटकर गृह निर्माण करता है तो ये दोनों ही दिशाएं कट जाती हैं, जो वास्तु पुरुष का गला काटने सदृश दोषपूर्ण और घातक होती है। यही फॉर्मूला रुपये के सिंबल पर भी लागू होता है। रुपये का गला काटने के बाद से देश पर एक के बाद एक आफतें आ रही हैं तथा सरकार द्वारा उठाये गये सभी कदम फिसड्डी साबित हो रहे हैं।

झाँझरी ने कहा कि थाली, ताली, शंखध्वनि के जरिये देश से कोरोना को भगाने की बेतुकी घोषणा कर हंसी का पात्र बनने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अब सरकारी विभाग द्वारा देश की भयंकर आॢथक बदहाली की पुष्टि के बाद समस्या को दूर करने की ठोस पहल करते हैं या फिर जनता से थाली, ताली पिटवाते हैं, यह देखने की बात होगी।

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