देश बड़ी खबर

जिस नए कश्मीर का प्रचार किया जा रहा है वह सिर्फ धोखा है: महबूबा मुफ़्ती

श्रीनगर। जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी पार्टी की नेता महबूबा मुफ़्ती ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। महबूबा मुफ़्ती ने गृहमंत्री अमित शाह के उस दावे और बयान पर भी निशाना साधा जिसमे उन्होंने कश्मीर से अनुछेद 370 हटाए जाने के बाद नया कश्मीर बनने की बात कही है।

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि ये नया हिंदुस्तान हो सकता है, लेकिन ये मेरे गांधी का नहीं है। ये नाथूराम गोडसे का भारत लगता है और वो गोडसे का कश्मीर बना रहे है जहां लोगों को बोलने की आजादी नहीं है और यहां तक कि मुझे भी एक हफ्ते में कम से कम दो दिनों तक घर में नजरबंद किया जाता है।

केंद्र ने जम्मू कश्मीर को शांतिपूर्ण दिखाया है जबकि असलियत ये है कि सड़कों पर खून बहाया जा रहा है और अपने विचार रखने के लिए लोगों पर आतंकवाद रोधी कानून थोपे जा रहे हैं। नया कश्मीर के बारे में महबूबा ने कहा कि उनके दिवंगत पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद ने 2014 में भारतीय जनता पार्टी से इसलिए गठबंधन किया था, क्योंकि वो राज्य में शांति का नया शासन लाना चाहते थे।

ये भी पढ़ें:  पीएम की सुरक्षा में चूक: सुप्रीमकोर्ट ने केंद्र-राज्य की जांच रोकने का आदेश दिया, पैनल करे जांच

उन्होंने कहा कि मेरे पिता ने पहले अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता को देखा था और उन्हें उम्मीद थी कि बीजेपी की नई सरकार इसी विचारधारा पर काम करेगी। जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने नया कश्मीर शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाया और कहा कि जिस नए कश्मीर का प्रचार किया जा रहा है वो सच्चाई नहीं है।

महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि आज 18 महीने की लड़की सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए अपने पिता का शव पाने के लिए प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने पूछा कि आज एक कश्मीरी पंडित की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। सड़क पर एक बिहारी व्यक्ति का खून बहाया गया और हम इसे नया कश्मीर बुलाते हैं?

उन्होंने कहा कि नया कश्मीर भूल जाइए और नया हिंदुस्तान के बारे में बात करिए। नए हिंदुस्तान में संविधान के बारे में बात करने वाले हर व्यक्ति को टुकड़े टुकड़े गिरोह का तमगा दिया जाता है। अल्पसंख्यकों, चाहे वो सड़क किनारे का विक्रेता हो या कोई फिल्म स्टार, उसे सामाजिक और आर्थिक रूप से बहिष्कृत कर दिया जाता है। कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे किसानों को खालिस्तानी कहा जाता है और उन पर यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है।

हमें सबसे पहले धोखा दिया गया. अगर ये गारंटी थी तो इसे रद्द क्यों किया गया। कई राज्य हैं, जो बाहरी लोगों को जमीन खरीदने की अनुमति नहीं देते या अपने लोगों के लिए रोजगार सुनिश्चित करते हैं। अगर उनके साथ कोई दिक्कत नहीं है तो कश्मीर पर सवाल क्यों उठाना।

ये भी पढ़ें:  हरिद्वार धर्म संसद में नफरती भाषण: कल होगी सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई

उन्होंने आगाह किया कि कश्मीर में जो हो रहा है उसे बाकी देश में दोहराया जाएगा। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि केंद्र को जम्मू कश्मीर में जल्द से जल्द राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए और संवाद शुरू करना चाहिए।

अपनी राय कमेंट बॉक्स में दें
सत्य को ज़िंदा रखने की इस मुहिम में आपका सहयोग बेहद ज़रूरी है। आपसे मिली सहयोग राशि हमारे लिए संजीवनी का कार्य करेगी और हमे इस मार्ग पर निरंतर चलने के लिए प्रेरित करेगी। याद रखिये ! सत्य विचलित हो सकता है पराजित नहीं।
ताज़ा हिंदी समाचार और उनसे जुड़े अपडेट हासिल करने के लिए फ्री मोबाइल एप डाउनलोड करें अथवा हमें फेसबुक, ट्विटर या गूगल पर फॉलो करें