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आंदोलन में मारे गए किसानो के परिजनों को मुआवजा दे सरकार, लिस्ट न हो तो हमसे ले ले- राहुल

नई दिल्ली। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज सरकार के उस बयान पर पलटवार किया जिसमे कहा गया था कि किसान आंदोलन के दौरान मृत किसानो का सरकार के पास कोई डेटा नहीं है, इसलिए मुआवजा देने का प्रश्न नहीं है।

राहुल गांधी ने किसान आंदोलन में मृत 403 किसानो की लिस्ट जारी करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले सदन में एक सवाल पूछा गया कि क्या केंद्र सरकार 700 मृतक किसानों (किसान आंदोलन के दौरान हुई किसानों की मौत) को मुआवज़ा देगी या नहीं? इसका जवाब मिला कि उनके पास किसानों का कोई रिकॉर्ड नहीं था।

उन्होंने कहा कि कोरोना में कितने लोग मरे और किसान कितने मरे सरकार के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसका कारण ये हैं कि आप इन लोगों को मुआवज़ा नहीं देना चाहतें। जब ये शहीद हुए आपने सदन में 2 मिनट का मौन व्रत नहीं किया। अगर वो चाहते हैं तो हमारी लिस्ट लें और 700 लोगों को मुआवज़ा दें।

राहुल गांधी ने कहा कि पंजाब सरकार के पास 403 नाम है उनको हमने 5 लाख रु.का मुआवज़ा दिया है,152 लोगों को हमने नौकरी दी है और बाकी लोगों को भी देंगे। हमारे पास 700 में से 500 नाम है जो लिस्ट हमने सरकार को दी। बाकी नाम हमारे पास पब्लिक रिकॉर्ड से हैं उसकी जांच कर सरकार 700 लोगों को मुआवज़ा दें।

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उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री उन परिवारों के बारे में सोचें, उनके बच्चों व उनकी शिक्षा और हेल्थ केयर के बारे में सोचें तो चंद मिनटों में यह काम कर दें मगर प्रधानमंत्री सिर्फ अपनी इमेज और अपनी पोजीशन के बारे में सोच रहे हैं।

किसानो की मांगो का समर्थन करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि किसानों की मांगें हैं और हमने पहले भी कहा है; हम उनकी मांगों का समर्थन करते हैं; मगर ये जो कम से कम मुआवजा है, ये तो सम्मान की बात है, जो किसानों को मिलना चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा कि पैसा किसके पास नहीं है? पैसा किसानों के पास नहीं है; सरकार के पास क्यों नहीं है पैसा, लाखों करोड़ों रूपए पेट्रोल और डीज़ल से ले रहे हैं; वो आपको और किसानों को तो नहीं मिल रहा है तो फिर कहाँ जा रहा है वो पैसा?

उन्होंने कहा कि जब भी गरीबों और मजदूरों की बात उठती है तो आप कहते हो कि पैसा नहीं है, लेकिन जैसे ही आपके 3 से 4 घोर पूँजीपति दोस्तों की बात आती है तो पैसों की कोई कमी नहीं होती।

राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मैं माफ़ी मांग रहा हूँ’; माफ़ी किसलिए मांग रहे थे क्योंकि उन्होंने जो तीन कानून लागू किए वो गलत थे; कानून लागू किए इसलिए किसान बाहर निकले थे। आपने अगर माना है कि यह आपकी जिम्मेदारी है, तो फिर आपको यह भी मानना पड़ेगा कि जो किसानों की मृत्यु हुई है वो भी आपकी जिम्मेदारी है और इसलिए आपको मुआवजा देना पड़ेगा।

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उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री जी और सरकार के जो 2-3 सबसे बड़े उद्योगपति मित्र हैं उनके लिए ये कुछ भी कर देते हैं; जो भी करना होता है करते हैं; मगर जब किसान और मजदूर को ज़रूरत होती है तब ये कहते हैं कि ये लोग तो हैं ही नहीं।

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