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फ्रांस से 5 राफेल विमान पहुंचे भारत, अंबाला वायुसेना केंद्र पर रहेंगे तैनात

नई दिल्ली। फ़्रांस से 5 राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप आज भारत पहुंची। एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर पांच राफेल लड़ाकू विमानों की अगवानी की। इस मौके पर एयर चीफ मार्शल बी.एस. धनोआ भी मौजूद रहें।

राफेल विमानों के भारतीय वायु सेना में शामिल होने से भारतीय वायुसेना और अधिक ताकतवर हो जाएगी। इस विमान में कई ऐसी खासियतें हैं, जो इसे आसमान में दुश्‍मन के लिए घातक बनाती हैं।

इससे पहले आज राफेल के भारत आने पर अंबाला वायुसेना केंद्र के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई और निषेधाज्ञा लागू की गई है। वहां वीडयोग्राफी और फोटो खींचने पर रोक लगा दी गई। इतना ही नहीं अंबाला जिला प्रशासन ने वायुसेना केंद्र के तीन किलोमीटर के दायरे में लोगों के ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

भारत ने 23 सितंबर 2016 को फ्रांसीसी एरोस्पेस कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए 59,000 करोड़ रुपए का सौदा किया था। छह राफेल प्रशिक्षु विमानों की पूंछ पर आरबी श्रृंखला की संख्या अंकित होगी।

पहली खेप में सोमवार को पांच विमानों ने फ्रांसीसी बंदरगाह शहर बोरदु में मेरिग्नैक एयरबेस से उड़ान भरी। ये विमान लगभग 7,000 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद बुधवार दोपहर को अंबाला पहुंचे। इन विमानों को औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना में शामिल करने के लिए मध्य अगस्त के आसपास समारोह आयोजित किया जाएगा।

राफेल को उड़ाने के लिए भारतीय वायुसेना के पायलट्स को फ्रांस के मोंट डे मार्सन हवाई अड्डे पर ट्रेनिंग दी गई। यहीं मिराज 2000 की ट्रेनिंग भी हुई थी। पायलट्स के अलावा इंजीनियरों और टेक्नीशियंस को भी ट्रेनिंग दी गई है। राफेल फाइटर जेट्स हवा से हवा में, हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइल से हमला करने में सक्षम होती है।

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