बिहार-झारखंड राज्य

तेजस्वी ने बदली रणनीति, कई विधायकों के कट सकते हैं टिकिट

पटना ब्यूरो। बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए अब सभी राजनैतिक दल अपने उम्मीदवारों लिस्ट तैयार करने में जुट गए हैं। हालांकि अभी एनडीए और महागठबंधन में घटक दलों के बीच सीटों का बंटवारा बाकी है और इसके लिए अगला सप्ताह निर्णायक माना जा रहा है।

एनडीए में जहां लोकजनशक्ति पार्टी को लेकर सस्पेंस बरकरार है वहीँ महागठबंधन में राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। माना जा रहा है कि सीटों के बंटवारे को लेकर अंतिम निर्णय आने तक बिहार की चुनावी तस्वीर बन बिगड़ सकती है।

राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस ने इस बार टिकिट वितरण से पहले एक निजी एजेंसी से सर्वे कराया है। सूत्रों की माने तो राजद के करीब 30 फीसदी विधायकों की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं आई है। सर्वे में सामने आया है कि करीब 30 फीसदी सिटिंग एमएलए के कामकाज से उनके विधानसभा क्षेत्र की जनता खुश नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक सर्वे में यह भी सामने आया है कि यदि इन सीटों पर वर्तमान विधायकों के टिकिट काटकर नए चेहरों को टिकिट दिया गया तो राजद इन सीटों पर कब्ज़ा बरकरार रख सकती है।

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सूत्रों ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय जनता दल अपने कुछ वर्तमान विधायकों के टिकिट काटकर नए चेहरों को मैदान में उतार सकती है। सूत्रों ने कहा कि अभी इस निर्णय पर राजद सुप्रीमो लालू यादव की अंतिम मुहर लगना बाकी है।

बदली रणनीति:

राष्ट्रीय जनता दल सूत्रों के मुताबिक तेजस्वी यादव ने विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति में बड़ा परिवर्तन किया है। अब युवा सरकार पर ज़्यादा ज़ोर नहीं दिया जाएगा। राजद सूत्रों ने कहा कि राजद सुप्रीमो लालू यादव ने तेजस्वी यादव से साफ़ तौर पर कहा है कि चुनाव संपन्न होने तक मुख़्यमंत्री पद को लेकर कोई नाम आगे न बढ़ाएं बल्कि नीतीश सरकार के कार्यकाल में हुई खामियों को उजागर करने में पूरी ताकत लगाएं।

पप्पू यादव से बात कर रही कांग्रेस:

दूसरी तरफ खबर यह भी है कि सेकुलर मतो का विभाजन रोकने की कोशिश में जुटी कांग्रेस पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी के भी संपर्क में है। हालांकि कांग्रेस को यह भी मालुम है कि पप्पू यादव की पार्टी से किसी तरह का गठबंधन करने के लिए राजद सुप्रीमो लालू यादव जल्द ही आसानी से तैयार नहीं होंगे।

लेकिन सूत्रों ने कहा कि राजनीति में कोई किसी का स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता। इसलिए यदि पप्पू यादव को साथ लेकर बीजेपी-जेडीयू को पटका जा सकता है तो लालू यादव इस गठबंधन से इंकार नहीं करेंगे।

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9 अक्टूबर को होगा लालू यादव की ज़मानत पर फैसला:

फिलहाल आगामी सप्ताह को कई मायनो में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी दौरान तेजस्वी यादव रांची में राजद सुप्रीमो लालू यादव से भी मुलाकात करेंगे। लालू यादव की ज़मानत अर्ज़ी पर झारखंड हाईकोर्ट 9 अक्टूबर को अपना फैसला सुनाएगा। जैसी कि संभावना है 9 अक्टूबर को झारखंड हाईकोर्ट लालू यादव को ज़मानत दे सकता है, यदि ऐसा हुआ तो बिहार की चुनावी तस्वीर एक बार फिर रातोरात बदलने की संभावना है।

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