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केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति पर राज्यों में उठने लगे विरोध के सुर

चेन्नई। केंद्र सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति में 3 भाषाओँ के प्रावधान पर अब राज्यों में विरोध के सुर उठाने शुरू हो गए हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने कहा है कि मुझे दुख है कि नई शिक्षा नीति में सरकार त्रिभाषा नीति लेकर आई है। हमारा राज्य दशकों से दो भाषाओं की नीति पर चल रहा है और इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को चाहिए कि वह राज्यों को अपनी नीति के मुताबिक फैसला लेने दे। पलानीस्वामी ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध करता हूं कि वे तमिलनाडु के लोगों की तीन भाषाओं की नीति पर पुनर्विचार करने की मांग पर ध्यान दें।

नई शिक्षा नीति में त्रिभाषा फार्मूला लागू होने के बाद विशेषकर दक्षिणी राज्यों से विरोध का स्वर उठा था। उसके अंतर्गत स्कूलों में एक क्षेत्रीय भाषा, अंग्रेजी और हिंदी को स्थान दिया गया है।

हालांकि, नई शिक्षा नीति में राज्यों पर ये निर्णय छोड़ा गया है कि वे किस तीन भाषा को शामिल करेंगे। इसके बावजूद तमिलनाडु में राजनीतिक पार्टियां इसे केंद्र की ओर से राज्य में हिंदी लागू कराने के प्रयास के तौर पर देख रही हैं। गौरतलब है कि नई शिक्षा नीति 2020 को बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी।

इससे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने रविवार को कहा था कि किसी भी राज्य पर केंद्र कोई भाषा थोपने की कोशिश नहीं करेगी। तमिलनाडु में नई शिक्षा नीति का विरोध करने वालों का कहना है कि केन्द्र सरकार इसके माध्यम से हिन्दी और संस्कृत को थोपना चाहती है।

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