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नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ नई याचिका पर सुप्रीमकोर्ट का केंद्र को नोटिस

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधित कानून के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में दायर की गई नई याचिका पर देश की सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है। इस याचिका को नागरिकता कानून को लेकर पहले से लंबित याचिकाओं के साथ संलग्न किया गया है।

नई याचिका में कहा गया है कि मुस्लिम वर्ग को स्पष्ट रूप से अलग रखना संविधान में प्रदत्त मुसलमानों के समता और पंथनिरपेक्षता के अधिकारों का हनन है।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति ऋषिकेश राय की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इस मामले की सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किए। पीठ ने इसी मुद्दे पर पहले से ही लंबित याचिकाओं के साथ इन याचिकाओं को संलग्न करने का आदेश दिया।

गौरतलब है कि नागरिकता कानून के खिलाफ पहले ही कई याचिकाएं लंबित हैं। ये याचिकाएं कानून की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, कांग्रेस के नेता जयराम रमेश, राजद नेता मनोज झा, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा, तमिलनाडु तौहीद जमात, शालिम, ऑल असम लॉ स्टूडेन्ट्स यूनियन, मुस्लिम स्टूडेन्ट्स फेडरेशन और सचिन यादव की तरफ से दायर की गई हैं।

देश में 10 जनवरी को अधिसूचित नागरिकता संशोधन कानून के तहत 31 दिसंबर 2014 तक अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में आस्था के आधार पर उत्पीड़न के कारण भारत आए गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के सदस्यों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है।

वहीँ नागरिकता संशोधित कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं में इस कानून में धार्मिक आधार पर नागरिकता दिए जाने को चुनौती दी गई है। याचिकाओं में कहा गया है कि धार्मिक आधार पर नागरिकता दिए जाने का प्रावधान भारत के संविधान की मूल भावनाओं के विरुद्ध है।

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