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सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने 26 नवंबर को बुलाई बैठक, अयोध्या फैसले पर होगी बात

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में आये सुप्रीमकोर्ट के फैसले पर विचार विमर्श करने के लिए सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने 26 नवंबर को बैठक बुलाई है। एएनआई न्यूज़ के मुताबिक सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन ज़फर फारुकी ने कहा कि इस बैठक में अयोध्या मामले में आये सुप्रीमकोर्ट के फैसले पर विचार किया जायेगा।

इससे पहले आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी ने सुप्रीमकोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्यों से सलाह मशविरे के बाद इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने पर विचार किया जायेगा।

वहीँ सुप्रीमकोर्ट के निर्णय पर टिप्पणी करते हुए आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फारुकी ने कहा कि ‘इसके बदले हमे सौ एकड़ ज़मीन भी दें तो कोई फायदा नहीं। उन्होंने कहा कि हमारी 67 एकड़ ज़मीन पहले ही अधिग्रहित करने के बाद 5 एकड़ ज़मींन दे रहे हैं। ये कहाँ का इन्साफ है।

क्या होती है पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई:

कानून के जानकारों के मुताबिक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई होनी चाहिए या नहीं या कोर्ट तय करता है। यदि कोर्ट पुनर्विचार याचिका को सुनवाई के लिए मंजूर करता है तो पुनर्विचार याचिका पर वही पीठ सुनवाई करती है जिसने फैसला दिया है। ऐसे में यदि मुस्लिम पक्ष 17 नवंबर के बाद पुनर्विचार याचिका दायर करता है तो तब चीफ जस्टिस रंजन गोगोई सेवा अवकाश ले चुके होंगे।

ऐसे में अयोध्या मामले में सुनवाई करने वाली पीठ में शामिल अन्य न्यायाधीश आपस में बैठक कर यह तय कर सकते हैं कि सेवा अवकाश लेने के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के स्थान पर किस नए न्यायाधीश को पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई में शामिल किया जाए।

जानकारों के मुताबिक पुनर्विचार याचिका पर ओपन कोर्ट में सुनवाई नहीं होती बल्कि चैंबर में सुनवाई होती है लेकिन यदि याचिका करने वाला पक्ष ओपन कोर्ट में सुनवाई की मांग रखता है तो इसपर ओपन कोर्ट में भी सुनवाई हो सकती है।

इससे पहले आज अयोध्या में विवादित भूमि के मालिकाना हक़ को लेकर सुप्रीमकोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि विवादित ढांचे की जमीन हिंदुओं को दी जाये। 2.77 एकड़ ज़मीन हिन्दुओं के पक्ष में रहेगी।

वहीँ मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ ज़मीन अलग से दी जाएगी। कोर्ट के फैसले के मुताबिक केंद्र या राज्य सरकार अयोध्या में ही मस्जिद के लिए सुटेबल और प्रॉमिनेंट जगह पर जमीन दे। अधिग्रहीत जमीन फिलहाल रिसीवर के पास रहेगी।

सुप्रीमकोर्ट कोर्ट के फैसले के मुताबिक राम मंदिर के लिए केंद्र सरकार तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाएगी। ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़ा का प्रतिनिधि भी रहेगा।

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