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किसानो के मुद्दे पर संसद से सड़क तक लड़ाई की तैयारी में कांग्रेस, सोनिया गांधी ने बुलाई बैठक

नई दिल्ली। किसानो के मुद्दे पर कांग्रेस केंद्र सरकार के खिलाफ लंबी और निर्णायक लड़ाई की तैयारी कर रही है। कृषि अध्यादेशों के खिलाफ कांग्रेस लगातार विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश कर रही है और इसमें वह बहुत हद तक सफल भी रही है।

मोदी सरकार द्वारा लाये गए कृषि अध्यादेशों के खिलाफ पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में किसान आक्रामक तेवर दिखा रहे हैं। वहीँ माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में किसानो का आंदोलन कई अन्य राज्यों में भी शुरू हो जायेगा और इसके जल्द देशभर में जोर पकड़ने की संभावना है।

इस बीच कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को एक अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में पार्टी के सभी महासचिवों, प्रदेश यूनिट इंचार्ज और कमेटी के सदस्यों को शामिल होने के लिए कहा गया है।

किसानो के मुद्दे पर कांग्रेस संसद के दोनो सदनों में आक्रामक तेवर दिखा रही है। वहीँ कृषि अध्यादेशों पर पार्टी ने अपनी नीति स्पष्ट करने के लिए अपनी प्रेस ब्रीफिंग में इसे जोर शोर से उठाया है।

इससे पहले कृषि अध्यादेशों के मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल ने मोदी सरकार में अपनी भागीदारी समाप्त कर दी है। सरकार में शामिल केबिनेट मंत्री हरसमिरत कौर ने केबिनेट से इस्तीफा देकर एनडीए में शामिल कई अन्य दलों को एक बड़ा संदेश दे दिया है।

वहीँ हरियाणा में किसान संगठनों का दबाव सरकार पर बढ़ता जा रहा है। हरियाणा सरकार में शामिल जेजेपी पर भी किसानो का दबाव बन रहा है। यदि जेजेपी ने कृषि अध्यादेशों के मुद्दे पर हरियाणा सरकार से अपना हाथ खींच लिया तो राज्य की खट्टर सरकार के अल्पमत में आने का खतरा पैदा हो सकता है।

ऐसे में केंद्र सरकार पर पिछले कुछ दिनों में दबाव बढ़ा है। सूत्रों की माने तो जल्द ही बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव और मध्य प्रदेश में होने वाले 28 सीटों के उपचुनाव में कृषि अध्यादेश बीजेपी के लिए गले की फांस बन सकते हैं। इसलिए माना जा रहा है कि सरकार कृषि अध्यादेशों में कुछ संशोधनों का प्रस्ताव लेकर आये।

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