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एनसीपी के समर्थन के लिए शिवसेना को छोड़ना होगा NDA

मुंबई। महाराष्ट्र में चल रही राजनीतिक उठापटक के बीच एनसीपी का कहना है कि वह महाराष्ट्र में शिवसेना को सरकार बनाने के लिए तभी समर्थन देगी जब शिवसेना एनडीए से नाता तोड़ लेगी।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में बीजेपी द्वारा सरकार बनाने से इंकार करने के बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शिवसेना से पूछा कि क्या वह सरकार बनाने की स्थति में है।

महाराष्ट्र की राजनैतिक स्थिति को देखें तो कोई भी पार्टी अकेले सरकार बना पाने की स्थिति में नहीं है। यदि शिवसेना सरकार बनाने के लिए आगे बढ़ती है तो उसे भी शिवसेना और कांग्रेस के समर्थन की आवश्यकता होगी।

महाराष्ट्र में एनसीपी के सहयोग से सरकार बनाने के शिवसेना के प्रयासों के बीच एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि अगर शिवसेना हमारा समर्थन चाहती है तो उसे एनडीए से नाता तोड़ना होगा और बीजेपी से अपने रिश्ते खत्म करने होंगे।

इतना ही नहीं नवाब मालिक ने कहा कि शिवसेना को समर्थन के बदले केंद्रीय कैबिनेट से अपने सभी मंत्रियों को इस्तीफा दिलवाना होगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा के लिए 12 नंवबर को पार्टी ने अपने विधायकों की बैठक बुलाई है जिसमें आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

वहीँ अब खबर आ रही है कि 12 नवंबर (सोमवार) को शिवसेना नेता एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात कर सकते हैं। माना जा रहा है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बीच कल बैठक होगी।

इस बैठक में ही महाराष्ट्र में सरकार बनाने का मसौदा तय होगा। सूत्रों के मुताबिक सरकार बनाने का मसौदा तय होने के बाद शिवसेना की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन होगा। जिसमे एनडीए से अपने रिश्ते खत्म करने का एलान किया जाएगा।

गौरतलब है कि 288 सदस्यों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में बहुमत के लिए 145 विधायकों की आवश्यकता है। शिवसेना के विधायकों की तादाद 56 है और उसे 89 विधायकों की और आवश्यकता पड़ेगा। ऐसे में एनसीपी के 54 और कांग्रेस के 44 विधायकों को मिलाकर सदस्यों की संख्या 154 हो जाती है जो बहुमत से 9 अधिक है।

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