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चर्चा में: 1400 किलोमीटर स्कूटी चलाकर लॉकडाउन में फंसे अपने बच्चे को घर लाने वाली रज़िया

नई दिल्ली। कोरोना वायरस फैलने से रोकने के लिए देश में अचानक हुए लॉकडाउन के एलान के बाद बहुत से लोग अपने घरो से दूर फंस गए। फ्लाइट, रेल और बस बंद होने के बाद यातायात का कोई साधन मौजूद नहीं होने के कारण लॉक डाउन में फंसे लोगों के पास कोई रास्ता भी नहीं बचा था।

इस सब के बावजूद तेलंगाना के निजामाबाद की रहने वाली एक महिला अपने बेटे को वापस लाने में कामयाब रही। रज़िया नामक इस महिला के प्रयासों को सोशल मीडिया पर सराहा जा रहा है। महिला ने हिम्मत दिखाते हुए स्कूटी पर 1,400 किलोमीटर का सफर तय किया और अपने बेटे को घर वापस लाने में सफल रही।

मामला आंध्र प्रदेश के नेल्‍लोर का है, जहां फंसे अपने बेटे को लाने के लिए मां रजिया बेगम ने अदभुत साहस और हिम्‍मत का परिचय दिया। उन्‍होंने निजामाबाद के बोधन से आंध्र प्रदेश के नेल्‍लोर तक की 1,400 किलोमीटर की दूरी तीन दिनों में अपनी स्‍कूटी के जरिए तय की और नेल्‍लोर में फंसे अपने बेटे को वापस घर लेकर आई।

50 वर्षीय रजिया पेशे से शिक्षिका हैं। बेटे को लाने के लिए रजिया ने 1,400 किलोमीटर का सफर सोमवार सुबह शुरू किया था और बुधवार शाम को बेटे के साथ वापस घर लौटीं। मंगलवार दोपहर को नेल्‍लोर में उन्‍होंने अपने 17 वर्षीय बेटे मोहम्‍मद निजामुद्दीन को लिया जो वहां अपने एक मित्र के घर में लॉकडाउन के कारण फंसा था। रजिया ने तीन दिनों में इतना लंबरा सफर तय किया।

बोधन के सहायक पुलिस कमिश्‍नर वी जयपाल रेड्डी ने जो पत्र रजिया को दिया था उसमें उन्‍होंने अधिकारियों से कहा कि रजिया को जाने की अनुमति दी जाए, ताकि वो अपने बेटे को वापस ला सकें। रजिया बेगम ने बताया कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश दोनों ही राज्‍यों में पुलिस ने उन्‍हें कई जगहों पर रोका, लेकिन पुलिस ऑफिसर के पत्र को देखने के बाद जाने की अनुमति दे दी।

एक बेटी व एक बेटे की मां रजिया के पति की मौत 12 साल पहले ही हो गई थी। 2019 में बारहवीं की पढ़ाई करने के बाद निजामुद्दीन मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए हैदराबाद के एक कोचिंग में पढ़ाई कर रहा हैं। रजिया बेगम ने बताया कि किस तरह पुलिस ने मानवता दिखाते हुए उनकी मदद की।

उन्‍होंने कहा, ‘मैंने अपनी मजबूरी और हालात से बोधन के एसीपी को अवगत कराया। इसके बाद मुझे उन्‍होंने अनुमति दे दी। कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत 25 मार्च से भारत में लॉकडाउन जारी कर दिया है जो 14 अप्रैल तक रहेगा।

रज़िया का बीटा 12 मार्च को निजामुद्दीन अपने दोस्‍त के साथ नेल्‍लोर गया था, क्‍योंकि उसके दोस्त के पिता अस्‍पताल में भर्ती थे। इसके बाद 23 मार्च को राज्‍य में लागू हुए लॉकडाउन के कारण वह वहीं फंस गया। रजिया ने बताया कि वह निडर हो सुनसान रास्‍ते पर लगातार चलती रही। इतने लंबे सफर के बावजूद वह नेल्‍लोर में एक दिन के लिए भी नहीं रुकी और तुरंत वापस अपने घर लौट आई।

एसीपी जयपाल रेड्डी ने कहा कि वह रजिया की इच्‍छा देखकर उसे रोक न सके। उन्‍होंने बताया, ‘बेटे के प्रति उसका प्‍यार देखते हुए उसे रोक न सका। मैंने केवल बोधन से नेल्‍लोर तक के लिए पुलिस ऑफिसरों से अनुमति देने की अपील की।’

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