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कपिल सिब्बल के बयान पर कांग्रेस में माहौल गर्म

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल द्वारा बिहार में पार्टी के प्रदर्शन पर की गई टिप्पणी से कांग्रेस में माहौल गर्मा गया है। कपिल सिब्बल के बयान के बाद एक के बाद एक कई कांग्रेस नेताओं ने पार्टी हाईकमान के पक्ष में बयान दिए किये हैं। इंन नेताओं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद और मल्लिकार्जुन खड़के शामिल हैं।

गुरूवार को वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़के ने कहा कि हमने एक होकर चुनाव लड़ा. ये दुखद है कि कुछ वरिष्ठ नेता टॉप लीडरशिप के खिलाफ बोल रहे हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री स्व इंदिरा गांधी की जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खड़के ने कहा कि हमे इस बात का ध्यान रखना होगा कि अगर हम अपनी पार्टी और नेताओं को इस तरह कमजोर करेंगे तो हम आगे नहीं जा पाएंगे और अगर हमारी विचारधारा कमजोर होगी तो हम नष्ट हो जाएंगे।

गौरतलब है कि मल्लिकार्जुन खड़के से पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी कपिल सिब्बल के बयान को लेकर नसीहत की थी कि इस तरह के बयान सार्वजनिक मंचो और मीडिया में देने से पार्टी को नुकसान होता है।

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गहलोत ने ट्वीट कर कहा था, ‘कपिल सिब्‍बल को मीडिया के समक्ष हमारे आंतरिक मुद्दे का जिक्र करने की कोई जरूरत नहीं थी, इससे देश भर में पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है।’

एक अन्‍य ट्वीट में गहलोत ने लिखा, ‘कांग्रेस ने 1969, 1977, 1989 और बाद में वर्ष 1996 में विभिन्‍न संकटों का सामना किया लेकिन हर बार हम अपनी विचारधारा, कार्यक्रम, नीतियों और पार्टी नेतृत्‍व में विश्‍वास के चलते मजबूत बनकर उभरे हैं।’

क्या कहा था कपिल सिब्बल ने:

दरअसल कपिल सिब्बल उन 23 नेताओं में से एक हैं जिन्होंने अगस्त में पार्टी नेतृत्व के विरोध में एक संयुक्त पत्र लिखा था। कपिल सिब्बल ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में बिहार के चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर कहा था कि पार्टी में अनुभवी ज्ञान रखने वाला, सांगठनिक स्तर पर अनुभवी और राजनीतिक हकीकत को समझने वाले लोगों को आगे लाने की ज़रूरत है। सिब्बल ने कहा कि इस समय पार्टी को एक सतर्क नेतृत्व की जरूरत है, जो बेहद एहितयात के साथ अपनी बातों को जनता के सामने रखे।

इतना ही नहीं सिब्बल ने कहा कि जिन राज्यों में सत्तापक्ष का विकल्प हैं, वहां भी जनता ने कांग्रेस के प्रति उस स्तर का विश्वास नहीं जताया, जितना होना चाहिए था। लिहाजा आत्मचिंतन का वक्त खत्म हो चुका है। हम उत्तर जानते हैं। कांग्रेस में इतना साहस और इच्छा होनी चाहिए कि सच्चाई को स्वीकार करे।”

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