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ममता को कांग्रेस का अघोषित समर्थन, पहले चरण का चुनाव पूरा लेकिन नदारद रहे स्टार प्रचारक

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में शनिवार को पहले चरण का चुनाव संपन्न होने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस को अघोषित समर्थन दे दिया है ? यह सवाल इसलिए भी उठा रहा है क्यों कि पहले चरण में 5 जिलों की 30 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव के लिए कांग्रेस का कोई बड़ा नेता प्रचार में नहीं दिखा।

हालांकि असम, तमिलनाडु और केरल की तरह कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल के लिए भी स्टार प्रचारकों की सूची जारी की थी। इस सूची में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व पीएम डा मनमोहन सिंह, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी सहित कई कद्दावर नेताओं के नाम शामिल किये गए थे।

पहले चरण के चुनाव के प्रचार के लिए कांग्रेस का कोई कद्दावर नेता पश्चिम बंगाल नहीं पहुंचा। स्वयं राहुल गांधी ने भी खुद को असम, केरल और तमिलनाडु तक ही सीमित रखा है। वहीँ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पार्टी उम्मीदवारों के लिए असम में जमकर जनसभाओं को संबोधित किया लेकिन वे भी पश्चिम बंगाल नहीं पहुंची।

ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर कांग्रेस बंगाल को इतने हल्के में क्यों छोड़ रही है। क्या पार्टी ने एक रणनीति के तहत बंगाल में हल्का हाथ रखा है जिससे सेकुलर वोटों का विभाजन न हो और बीजेपी को रोका जा सके?

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पार्टी सूत्रों की माने तो पश्चिम बंगाल के चुनाव को लेकर प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी की ज़िद्द पर ही कांग्रेस ने वामदलों के साथ गठबंधन किया गया है। हालांकि पार्टी के कई बड़े नेता पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के पक्षधर थे लेकिन पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी और ममता बनर्जी के बीच छत्तीस का आंकड़ा होने के कारण गठबंधन का फैसला अधीर रंजन चौधरी पर छोड़ दिया गया था।

सूत्रों ने कहा कि चूंकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच घनिष्ठ संबंध हैं इसलिए सोनिया गांधी नहीं चाहती थीं कि सेकुलर वोटों के विभाजन का लाभ लेकर पश्चिम बंगाल में बीजेपी सत्ता तक पहुंच जाए और इसका ठीकरा कांग्रेस के ऊपर फोड़ा जाए। यही कारण है कि कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया और पूरा चुनाव पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस पर छोड़ दिया।

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस जिन 92 सीटों पर चुनाव लड़ रही है उनमे से सिर्फ 45 सीटों पर ही फोकस करेगी। इनमे 44 सीटें वे हैं जो कांग्रेस ने पिछले चुनाव में जीती थीं।

सूत्रों ने कहा कि पार्टी ने पश्चिम बंगाल के स्थान पर असम पर अधिक ध्यान देने का फैसला लिया, जहां सत्ता में वापसी की संभावनाएं हैं। यही कारण है कि कांग्रेस ने पार्टी के दिग्गजों के अलावा राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव का रोड शो और सभा भी आयोजित की।

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असम में कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चुनाव में बड़ी ज़िम्मेदारी दी हुई है वहीँ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ स्टार प्रचारक के तौर पर असम में वोट मांगने गए हैं। इसके अलावा बिहार, झारखंड सहित कई राज्यों के कांग्रेस नेता असम में डेरा डाले हुए हैं।

फिलहाल यह माना जा रहा है कि विपक्ष की एकता को ध्यान में रखकर कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में अपनी चुनावी रणनीति बदली है और वह भविष्य में होने वाले उत्तर प्रदेश, उत्तरखंड जैसे राज्यों के चुनाव में विपक्ष की एकता के तौर पर देख रही है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी अभी से सधे हुए कदमो से चल रही है और पार्टी की कोशिश है कि वह प्रदेश में बनने वाले विपक्ष के गठबंधन में सम्मानजनक सीटों के साथ भागीदारी करे।

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