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अयोध्या मामला: मुस्लिम नेता ही कर रहे मुस्लिम समाज को गुमराह – जुनेद क़ाज़ी

न्यूयॉर्क। आईएनओसी यूएसए, के पूर्व अध्यक्ष जुनेद क़ाज़ी ने अयोध्या मामले में आये सुप्रीमकोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कोर्ट का फैसला उन मुस्लिम नेताओं के चेहरे पर तमाचा है जो वर्षो से हिन्दू मुस्लिम के नाम पर अपनी दुकाने चला रहे हैं।

जुनेद क़ाज़ी ने कहा कि मुस्लिम लीडरशिप ने भी मुसलमानो की छवि को नुकसान पहुँचाया है। और मुस्लिम समुदाय को विकास से वंचित रखा है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय को अब चिंतन करना चाहिए कि उनकी लीडरशिप किस तरह की हो।

उन्होंने कहा कि यदि मुस्लिम पक्षकारो ने पहले ही बड़ा दिल दिखाते हुए विवादित ज़मीन राम मंदिर बनाने के लिए हिन्दू पक्षकारो को दे दी होती तो आज स्थिति बदली हुई होती।

जुनेद काज़ी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को चाहिए कि वह कोर्ट के फैसले को ससम्मान स्वीकार करे और कौम की तरक्की के प्रयासों को लेकर आगे बढे। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय सुप्रीमकोर्ट के फैसले को प्रतिष्ठा से जोड़ने की जगह कौम की तरक्की को प्रतिष्ठा बनाये।

उन्होंने कहा कि बेहतर होता कि बाबरी मस्जिद विध्वंश के बाद ही मुस्लिम समुदाय इस मामले से हाथ खींच लेता और विवादित ज़मीन अपना दावा पर दावा छोड़ देता।

जुनेद क़ाज़ी ने कहा कि अब सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड और आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को चाहिए कि वे सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद पुनर्विचार याचिका की बातें करके मुसलमानो को और ज़्यादा गुमराह न करें।

मुस्लिम नेताओं पर मुस्लिम समाज को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए जुनेद क़ाज़ी ने कहा कि अब मुस्लिम समुदाय को चाहिए वे सोच विचार कर ऐसे नेता चुनें, जो कौम की तरक्की और कौम को देश की मुख्यधारा से जोड़ सकता हो।

उन्होंने कहा कि मैंने दो साल पहले सलाह दी थी कि अयोध्या की विवादित ज़मीन पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को कानूनी लड़ाई में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए बल्कि बड़प्पन दिखाते हुए विवादित ज़मीन को हिन्दू पक्षकारो को सौंप देना चाहिए।

जुनेद क़ाज़ी ने कहा कि इस्लामिक दृष्टि से भी यही बेहतर होता क्यों कि जिस ज़मीन पर विवाद पैदा हो जाए वहां मस्जिद बनाने की इजाजत इस्लाम भी नहीं देता। उन्होंने कहा कि नमाज़ पढ़ने के लिए ज़रूरी नहीं कि किसी ऐसी जगह पर ही मस्जिद बनाकर नमाज़ पढ़ी जाए जो विवादित है।

उन्होंने कहा कि अब देश के मुसलमानो को चाहिए कि वे कौम के शिक्षा और रोज़गार के लिए सोचें, साथ ही उन नेताओं का बहिष्कार करें जो मुसलमानो को गुमराह करके अपनी दुकाने चलाते आ रहे हैं।

जुनेद क़ाज़ी ने कहा कि मुस्लिम नेता भाषण तो बेहद भावनात्मक देते हैं लेकिन भाषण के बाद उन्हें कौम का ख्याल नहीं आता, वे कौन की तरक्की के बारे में नहीं सोचते बल्कि सिर्फ अपना सोचते हैं।

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