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उपचुनाव को लेकर कोई कसर नहीं रखना चाहते कमलनाथ, पीके को लेकर खबर आई सामने

भोपाल ब्यूरो। मध्य प्रदेश की 24 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर कांग्रेस पूरी गंभीरता से तैयारियों में जुटी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री स्वयं तैयारियों की कमान संभाल रहे हैं, जिससे चुनावी तैयारियों में कोई कसर न रह जाए।

सूत्रों की माने तो कमलनाथ ने सबसे पहले 14 नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति करके संगठन को मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू की है। उपचुनाव को लेकर कमलनाथ जिस तरह गंभीरता से 20 सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं, उससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि वे उपचुनाव में पूरी ताकत झौंकने का मन बना चुके हैं।

सूत्रों के मुताबिक कमलनाथ की नज़र चंबल ग्वालियर के इलाके की 16 सीटों पर है। इन सीटों पर कांग्रेस का दबदबा रहा है और पार्टी इन सीटों पर अच्छा प्रदर्शन कर सकती है। वहीँ ऐसी ख़बरें भी आ रही हैं कि उपचुनाव में बीजेपी को पटखनी देने के लिए कमलनाथ चुनावी चाणक्य प्रशांत किशोर के सम्पर्क में हैं और वे प्रशांत किशोर को उपचुनाव की रणनीति बनाने की कमान सौंप सकते हैं।

हालांकि कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर अभी ऐसी कोई पुष्टि नहीं की है लेकिन पिछले एक सप्ताह से कांग्रेस नेताओं के बीच यह खबर अवश्य घूम रही है कि उपचुनाव में कमलनाथ निजी तौर पर प्रशांत किशोर की सेवाएं लेने के पक्षधर हैं।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी ने प्रशांत किशोर की सेवाएं लेने के लिए करार किया था लेकिन प्रदेश के कांग्रेस नेताओं द्वारा लगातार विरोध किये जाने के बाद प्रशांत किशोर ने चुनाव से पहले ही कांग्रेस का काम छोड़ दिया था।

बागी विधायकों के इस्तीफे के बाद फ्लोर टेस्ट से पहले अपना इस्तीफा देने से पहले कमलनाथ द्वारा प्रेस कांफ्रेंस में कही गई बातो से यह तो ज़ाहिर हो गया था कि कमलनाथ यूं ही जल्द हार मानने वाले नहीं हैं। कमलनाथ ने बीजेपी का नाम लेते हुए कहा था कि उन्हें याद रखना चाहिए कि आज के बाद कल और कल के बाद परसो भी आएगा।

मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद से कमलनाथ मध्य प्रदेश में ही डेरा डाले हुए हैं। इसके पीछे अहम कारण उपचुनाव ही हैं। सूत्रों ने कहा कि कमलनाथ कई बीजेपी नेताओं के सम्पर्क में भी हैं और आने वाले दिनों में बीजेपी के कई पूर्व विधायक और नेता कांग्रेस का दामन थामते नज़र आएंगे।

सूत्रों की माने तो कमलनाथ ने उपचुनाव को लेकर अभी तक अपने पत्ते इसलिए नहीं खोले हैं कि वे इस इन्तजार में हैं कि राज्य में बीजेपी की सरकार बनने के बाद पार्टी के कितने नेता दल बदल कर बीजेपी में जाते हैं। जैसे जैसे उपचुनाव का समय करीब आएगा कमलनाथ अपने पत्ते खोलते जायेंगे।

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