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महिला किसानो पर टिप्पणी के खिलाफ 800 से अधिक महिला किसानो ने चीफ जस्टिस को लिखा पत्र

नई दिल्ली। महिला किसानो को लेकर सुप्रीमकोर्ट में की गई टिप्पणी के खिलाफ 800 महिला किसानो ने सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को खुला पत्र लिखकर महिला किसानो को लेकर की गई टिप्पणी पर रोष जताया है।

पत्र में कहा गया है कि सुप्रीमकोर्ट में किसान आंदोलन से संबंधित सुनवाई के दौरान कहा गया कि महिलाओं और बूढ़ों को वापिस भेज देना चाहिए और उन्हें आंदोलन में भाग नहीं लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में की गई यह टिपण्णी कृषि में महिलाओं की भागीदारी के प्रति अपमानजनक है। साथ ही, यह महिलाओं को किसान का दर्जा दिलाने के लिए लंबे समय से चल रहे संघर्ष का भी मजाक उड़ाती है।

सरकार के साथ एमएसपी पर किसानों की ओर से वार्ता में अग्रणी भूमिका निभाने वाली अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के वर्किंग ग्रुप व आशा की सदस्या कविता कुरुंगनती ने कहा “कोर्ट की सुनवाई व कोर्ट का आदेश कई मायनों में विवादास्पद व अस्वीकार्य है। महिला किसानों के प्रति व्यक्त किए गए विचारों में पितृसत्ता की झलक बेहद चिंताजनक है। हम सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह करते हैं कि वो महिलाओं की एजेंसी को स्वीकार करे।

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वहीँ किसान आंदोलन के लिए समर्थन जुटा रहीं यूथ फॉर स्वराज की राष्ट्रीय कैबिनेट की सदस्या जाह्नवी ने कहा कि यह आंदोलन केवल तीन कानूनों का विरोध करने का प्रतिनिधित्व नहीं करता बल्कि महिला बराबरी व सशक्तिकरण के एक स्पेस का भी प्रतिनिधित्व करता है। महिलाओं के बारे में ऐसे वक्तव्य देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय जैसी पवित्र संस्था का उपयोग पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं।

किसान आंदोलन में शामिल यूथ फॉर स्वराज की राष्ट्रीय कौंसिल की सदस्या अमनदीप कौर ने कहा कि “महिला इस आंदोलन में हर रूप और हर स्तर पर शामिल हैं: भाषण देना, व्यवस्था देखना, बैठकें, दवाई, रसोई, वापिस गाँव में खेतों की देखभाल, सामान की व्यवस्था से लेकर अलग-अलग हिस्सों में सैकड़ों धरना स्थलों का प्रबंधन: महिलाएँ इस किसान आंदोलन की आत्मा हैं। उनकी भूमिका को कम करना या उनकी एजेंसी को निरस्त करना बेहद निंदनीय है।”

गौरतलब है कि किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई के दौरान आंदोलन में महिलाओं और बच्चो के शामिल होने को लेकर भी सवाल उठे थे। सुनवाई के दौरान कहा गया कि महिलाओं और बूढ़ों को वापिस भेज देना चाहिए और उन्हें आंदोलन में भाग नहीं लेना चाहिए।

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