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केरल में हथिनी की मौत पर मोहम्मद ख़ुर्शीद अकरम सोज़ की नज़्म

ब्यूरो। केरल के साइलेंट वैली की एक गर्भवती हथिनी को किसी ने पटाखों से भरा अनानास खाने को दिया था . यह पटाखे हथिनी के मुंह में फट गए और 27 मई को इसकी मौत हो गई थी . इस दिल-सोज़ घटना की जितनी निंदा की जाए कम है . ऐसा ज़ुल्म इंसानों के साथ हो या जानवरों के साथ इसकी निंदा / मज़म्मत होनी ही चाहिये .

इस घटना ने कई दिनों से मुझको भी बेक़रार कर रखा है और इंसान नुमा दरिंदों के जानवरों के इलावा मासूम लोगों पर किये जाते रहे मज़ालिम भी आँखों में घूम रहे हैं. इसी पसमंज़र में यह नज़्म/कविता अहबाब की नज़्र कर रहा हूँ . उम्मीद करता हूँ कि इसे प्रकाशित कर शुक्रिया का मौक़ा इनायत करेंगे !

उफ़ ! वो गर्भवती गजिनी की मौत का मंज़र !

डाल रहा है मेरी रूह पे गहरा निश्तर
उफ़ ! वो गर्भवती गजिनी की मौत का मंज़र
जिसे किसी ने खाने में बारूद दिया
वाह रे इंसाँ! शैताँ को भी कितना पीछे छोड़ दिया
इस घटना पर खून के आँसू
रोता सारा आलम है
ह्रदयविदारक इस घटना की
जितनी निंदा कर लो कम है
लेकिन, इस घटना के पस मंज़र में
हैं और भी कितनी घटनायें
याद करो जब इक गर्भवती का
गर्भ चीर कर उसका बच्चा
कुछ इंसान-नुमा दरिंदों ने
त्रिशूल की नोक पे डाला था
फिर हवा में उसे उछाला था
कितने मासूमों को
जलती आग में कैसे डाला था
लेकिन ऐसा करने वाले
निर्दयी , ज़ालिम और दरिन्दे
अबतक आज़ादी से घूम रहे हैं
इक नये शिकार को ढूँढ रहे हैं
और हम बेबस लाचार पड़े हैं
क्यूँकि! ताक़तवर उनके साथ खड़े हैं
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डाल रहा है मेरी रूह पे गहरा निश्तर !
उफ़ ! वो बेबस , मासूमों की मौत का मंज़र !

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