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कुवैत के संसद में उठी 8 लाख 44 हज़ार भारतीयों को देश से बाहर करने की मांग

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण में मंदी की मार झेल रहे दुनियाभर के देशो में खाड़ी के देश भी शामिल हैं। इस बीच कुवैत की संसद में मांग की गई है कि देश में भारतीयों की बढ़ती तादाद पर लगाम लगाई जाए।

संसद में कुवैत के सांसदों ने अपनी मांग रखते हुए तर्क दिया कि कुवैत में बाहरी व्यक्तियों को कुल आबादी का 15 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। इसलिए कुवैत में रह रहे 8 लाख 44 हज़ार भारतियों को भारत वापस भेजने की नीति पर काम शुरू होना चाहिए।

सांसदों ने दूसरे देशो के नागरिको को कम करने के लिए सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि मिस्र के नागरिको को भी कम करने की मांग की। कुवैत के सांसदों ने यह प्रस्ताव संसद में रखा है।

इस प्रस्ताव में कहा गया है कि कुछ देशों से आने वाले प्रवासियों की संख्या कुवैत की आबादी के बराबर होती जा रही है जो सुरक्षा की दृष्टि से चिंताजनक है।प्रस्ताव में कहा गया है कि देश के भीतर रोज़गार के लिए आने वाले विदेशियों का कोटा तय कर दिया जाए और कोटा पूरा हो जाने की स्थिति में उस देश से किसी नए कामगार के लिए वीज़ा जारी न किया जाए।

सांसदों का कहना है कि यह समस्या पहले भी चिंता का विषय बनी लेकिन कोरोना महामारी के दौरान इस मुद्दे की गंभीरता को अधिक शिद्दत से महसूस किया गया।

कुवैत की संसद में यह प्रस्ताव संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में कई भारतीय कामगारों द्वारा इस्लाम के खिलाफ सोशल मीडिया साइट्स पर टिप्पणी किये जाने के मामले उजागर होने के बाद आया है।

बता दें कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में बीते माह करीब एक दर्जन से भारतीय कामगारों को इस्लाम के खिलाफ कथित तौर पर सोशल मीडिया साइट्स पर टिप्पणी करने के आरोप में नौकरियों से हटाकर वापस भारत भेज दिया गया है।

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