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पेगासस जासूसी: कपिल सिब्बल बोले,’सुप्रीमकोर्ट करे जांच, बंद कमरे में हो सुनवाई’

नई दिल्ली। पेगासस जासूसी मामले में घिरी केंद्र सरकार पर मंगलवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने बड़ा हमला बोला। सिब्बल ने आरोप लगाया कि ये सरकार डाटा प्रोटेक्शन की जगह डाटा कलेक्शन कर रही है।

इतना ही नहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि सुप्रीमकोर्ट को इस पूरे मामले की जांच करनी चाहिए तथा इस मामले की सुनवाई बंद कमरे में की जाए।

कपिल सिब्बल ने कहा कि संसद में एक श्वेत पत्र पेश किया जाना चाहिए और मंत्री को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि सरकार या किसी अन्य एजेंसी ने यहां पेगासस का इस्तेमाल किया है या नहीं। सरकार को यह भी बताना होगा कि जानकारी लेने के लिए सरकार के द्वारा पैसा नहीं दिए गए तो किसने दिए।

उन्होंने कहा कि सरकार ने अगर इसका इस्तेमाल नहीं किया तो फिर किसने किया क्योंकि सरकार को अलावा तो वो किसी को बेचते ही नहीं है। उन्होंने कहा कि आप कर्नाटक में सिद्धारमैया, देवगौड़ा सबकी जासूसी करवा रहे थे। ये राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।

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पेगासस जासूसी में सामने आ रहे नए तथ्य:

इस बीच इस पूरे प्रकरण की परतें उतरना शुरू हो गई हैं। हालांकि केंद्र सरकार पूरे मामले को आधारहीन बताकर अपना पल्ला झाड़ रही है लेकिन मंगलवार को द वायर द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कर्नाटक के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर, साथ ही तत्कालीन मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया के करीबी सहयोगी, सरकार गिराने से पहले निगरानी के लिए संभावित टारगेट थे।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो साल पहले उनकी सरकार के उनके फोन नंबर गैर-लाभकारी फ्रांसीसी मीडिया फॉरबिडन स्टोरीज द्वारा एक्सेस किए गए लीक डेटाबेस का हिस्सा हैं और एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया कंसोर्टियम के साथ साझा किए गए हैं, जिसमें द पेगासस प्रोजेक्ट के हिस्से के रूप में द वाशिंगटन पोस्ट, द गार्जियन और द वायर शामिल हैं।

द वायर की रिपोर्ट में बताया गया है कि कांग्रस नेता राहुल गांधी, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर, दो केंद्रीय मंत्री, टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी और 40 भारतीय पत्रकार जासूसी के संभावित टारगेट थे। यह लिस्ट भारत की एक अज्ञात एजेंसी की है, जो कि इयरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप का स्पाइवेयर पेगासस यूज करती है।

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