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बिहार: महागठबंधन में सीटों के बंटवारे पर हाईकमान की मुहर का इंतज़ार

पटना ब्यूरो। बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन में शामिल दलों के बीच सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला लगभग तय हो गया है। जहां एक तरफ सीटों के बंटवारे के फॉर्मूले पर कांग्रेस पार्टी हाईकमान के फैसले का इंतज़ार कर रही है वहीँ राष्ट्रीय जनता दल ने अपने सिटिंग एमएलए को सिंबल बांटना शुरू कर दिया है।

इससे पहले महागठबंधन में से रालोसपा और हम के जाने के बाद राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के बीच चली अंतिम दौर की बैठक में सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला तय हुआ। जहां कांग्रेस ने इस मामले को हाईकमान के पास स्वीकृति के लिए भेजा है वहीँ राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो ने इस फॉर्मूले पर अपने साइन करके सिटिंग एमएलए को पार्टी सिंबल दिए जाने को कहा है। जिससे वे अपना टिकिट सुनिश्चित मानकर अपना चुनावी काम शुरू कर सकें।

माना जा रहा है कि महागठबंधन के लिए अगले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं। जैसे ही कांग्रेस हाईकमान सीटों के बंटवारे पर अपनी मुहर लगा देगा, वैसे ही सीटों के बंटवारे का एलान कर दिया जाएगा।

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छोटे और नए दलों से बीजेपी-जेडीयू को खतरा:

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में पहले चरण की वोटिंग के लिए आज (01 अक्टूबर) से नामांकन शुरू हो गया है। नामांकन पत्र सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक संबंधित निर्वाचन अधिकारी ले सकेंगे। वहीँ इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में नए और छोटे दल किसी भी पार्टी की जीत में रोड़ा बन सकते हैं।
जय महाभारत पार्टी, समाजवादी जनता दल, भारत विकास पार्टी, किसान विकास पार्टी, क्रान्तिकारी समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी किसान संगठन, समाजवादी क्रान्तिकारी सेना, सम्पूर्ण विकास दल, राष्ट्रीय जन जन पार्टी, अखिल भारतीय अशोक सेना,अखिल भारतीय हिन्द क्रांति पार्टी, अखिल भारतीय देशभक्त मोर्चा तथा अखिल भारतीय मिथिला पार्टी जैसी कई पार्टियां इस बार चुनाव मैदान में हैं।

हालांकि इन छोटे और क्षेत्रीय दलों के उम्मीदवारों के पास संसाधनों की कमी होती है और प्राय देखा गया है कि ऐसे दलों के उम्मीदवार फाइट में नहीं आ पाते लेकिन इन दलों के उम्मीदवार को मिलने वाले वोट उस समय बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं जब दो उम्मीदवारों के बीच हारजीत का फैसला कम अंतर् से होता है।

पिछले कई चुनावो में देखा गया है कि क्षेत्रीय दल के कई उम्मीदवार अपने दम पर पांच हज़ार से अधिक वोट लाकर बड़े राष्ट्रीय दल के उम्मीदवार को जीता हुआ चुनाव हरा देता है। छोटे और क्षेत्रीय दलों के उम्मीदवारों ने कई राज्यों में इस तरह का उलट फेर किया है।

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