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बिहार: महागठबंधन का घोषणा पत्र जारी, किसानो की क़र्ज़ माफ़ी और रोज़गार का अहम वादा

पटना ब्यूरो। बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और वाम दलों के गठजोड़ वाले महागठबंधन का चुनावी घोषणा पत्र आज जारी हो गया है। इस घोषणा पत्र में किसानो की क़र्ज़ माफ़ी और दस लाख लोगों को रोज़गार देने की बात कही गई है।

इस अवसर और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि आज से नवरात्रि शुरू हो रही है। आज हम लोग कलश का स्थापना कर संकल्प लेते हैं कि अगर हमारी सरकार बनती है तो हम पहली कैबिनेट में पहली कलम से 10 लाख लोगों को नौकरी देंगे।

तेजस्वी ने राज्य की नीतीश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सीएम नीतीश 15 सालों में विशेष राज्य का दर्जा नहीं ले सके। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार को विशेष राज्य का दर्जा डोनाल्ड ट्रंप नहीं देंगे।

वहीँ कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि यह चुनाव, नई दिशा बनाम दुर्दशा का चुनाव है. यह चुनाव, नया रास्ता-नया आसमान बनाम हिन्दू-मुसलमान का चुनाव है। सुरजेवाला के कहा है जाले विधानसभा के प्रत्याशी ने कभी भी जिन्ना के विचार का समर्थन नहीं किया है। बीजेपी चुनाव में नफरत की राजनीति करके असली मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है।

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सुरजेवाला ने कहा कि बिहार में बीजेपी का जेडीयू और एलजेपी से अलग-अगल गठबंधन है। उनके मुताबिक बिहार में बीजेपी जेडीयू का गठबंधन नजर आता है। जबकि, बीजेपी और एलजेपी के साथ ही बीजेपी का गठबंधन ओवैसी साहब से भी है. बीजेपी तीन ठगबंधन के साथ चुनाव में उतरी है।

घोषणा पत्र की अहम बाते:

महागठबंधन के घोषणा पत्र में मुख्यतः किसानो और युवाओं पर फोकस किया गया है। घोषणा पत्र में कांग्रेस की किसानो की क़र्ज़ माफ़ी के मुद्दे को भी वरीयता दी गई है।

घोषणापत्र में बिहार में खाली 4.50 लाख और 5.50 लाख सरकारी पदों पर भर्ती करने और राज्य में सरकारी नौकरी के लिए फॉर्म पर लिए जाने वाले शुल्क को माफ किये जाने का अहम वादा किया गया है।

घोषणा पत्र में राज्य में किसान कर्जमाफी का वादा करते हुए कहा गया है कि राज्य में किसानों के ऋण को माफ किया जाएगा। इतना ही नहीं घोषणा पत्र में बिहार में नियोजन प्रथा खत्म करने नियोजित शिक्षकों को परमानेंट किये जाने का वादा प्रमुखता से किया गया है।

हाल ही में केंद्र द्वारा बनाये गए कृषि कानून को लेकर भी घोषणा पत्र में जगह दी गई है। घोषणापत्र में कहा गया है कि विधान सभा के पहले दिन तीनों कृषि बिल के खिलाफ प्रस्ताव लाया जाएगा।

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घोषणापत्र में बिहार में शिक्षा का स्तर सुधारने और शिक्षा का बजट बढ़ाने की बात कही गई है। घोषणापत्र में कहा गया है कि शिक्षा पर राज्य के कुल खर्च का 12 फीसदी हिस्सा खर्च किया जाएगा।

घोषणापत्र में बिहार में ट्रांसफर प्रक्रिया में बदलाव की बात कही गई है। कहा गया है कि नौकरशाही में ट्रांसफर प्रक्रिया मेरिट लिस्ट के आधार पर. इसके लिए एसओपी जारी किया जाएगा।

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