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हम बंगाल भी जाएंगें और किसानों को बताएंगें “किसी को भी वोट दो, भाजपा को नहीं”: नरेश टिकैत

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों द्वारा आंदोलन तेज किये जाने के एलान के बाद आज कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तौमर ने कहा कि सरकार किसानो से बातचीत के लिए हमेशा तैयार है।

क्रषि मंत्री ने कहा कि हमने किसानों से 12 दौर की बातचीत की। किसानों को कई संशोधन और कृषि क़ानूनों को डेढ़ साल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने प्रस्ताव पर कोई जवाब नहीं दिया। किसान जब भी सरकार के प्रस्ताव पर अपना मत लेकर आएंगे तो हम बातचीत के लिए तैयार है।

वहीँ कृषि कानूनों की वकालत करते हुए कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि कृषि क़ानूनों के फायदो के बारे में किसान यूनियन के नेता भी जानते हैं। राकेश टिकैत जी ने खुद कहा है कि नए कृषि क़ानून आने के बाद मेरे पिताजी की आत्मा को 27 साल बाद शांति मिली है और इन क़ानूनों से किसानों को फायदा होगा।

अन्य राज्यों में भी होगा आंदोलन का विस्तार:

दूसरी तरफ आज 92वे दिन भी दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन जारी है। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत सहित कई किसान संगठनों के नेता पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में किसान महापंचायतों का आयोजन कर रहे हैं।

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इस बीच खबर है कि किसान संगठनों ने तय किया है कि वे किसान आंदोलन से अन्य राज्यों को भी जोड़ेंगे। जल्द ही कई राज्यों में कृषि कानूनों के खिलाफ किसानो की बड़ी रैलियां आयोजित की जायेंगी।

किसान नेता हन्नान मोल्लाह ने कहा कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों में किसान महापंचायतो के आयोजन की ज़िम्मेदारी किसान संगठनों को दी गई है। जल्द ही मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में किसानो की बड़ी रैलियां आयोजित कर कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन तेज किया जाएगा।

कृषि कानून रद्द नहीं हुए तो चुनाव में दिख जाएगा असर:

वहीँ अयोध्या में रामलला के दर्शन करने पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यदि कृषि कानून रद्द नहीं किये गए तो इसका असर पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव तक में देखने को मिल जायेगा। उन्होंने कहा कि सरकार बातचीत के लिए ईमानदारी नहीं दिखा रही है।

नरेश टिकैत ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसान महापंचायतें जारी रहेंगी। टिकैत ने कहा कि हम पश्चिम बंगाल भी जाएंगें और किसानों को बताएंगें की किसी को भी वोट दो लेकिन भाजपा को नहीं, इनकी कथनी करनी में अंतर है।

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