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किसान आंदोलन ने ताज़ा की शाहीन बाग़ की याद, पूजा-नमाज़-अरदास सब एक जगह

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन ने नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ पिछले वर्ष 100 दिनों से अधिक दिन तक चले शाहीन बाग़ आंदोलन की यादें ताज़ा करा दी हैं।

सिंधु बॉर्डर पर हज़ारो की तादाद में सभी धर्मो के किसान मौजूद हैं। आंदोलन में जुटे किसानो के लिए सामूहिक रूप से लंगर पकाया जाता है। आंदोलन स्थल पर ही पूजा, नमाज़ और अरदास की जा रही है।

इतना ही नहीं बिना किसी धार्मिक और जातिगत भेदभाव के सभी किसान एक साथ बैठकर लंगर खाते हैं। लंगर बनाने और उसे वितरित करने का काम 25 आदमियों की एक टीम कर रही है। वहीँ पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से किसान आंदोलन में शामिल होने आ रहे लोग अपने साथ प्याज, आलू और आटा लेकर आ रहे हैं। जबकि दूध, सरसो का तेल, नमक, मसाले, चाय की पत्ती इत्यादि हरियाणा के किसान नियमित रूप से पहुंचा रहे हैं।

भारत की असली अनेकता में एकता देखनी हो तो किसान आंदोलन इस बात का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। किसान आंदोलन में पंजाब के कई किसान अपने पूरे परिवार के साथ शामिल हुए हैं। इन किसानो के साथ बच्चे भी हैं, जो दिन में धूप में बैठकर अपनी पढाई करते हैं और शाम को किसान आंदोलन में शामिल होते हैं।

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कृषि कानूनों के खिलाफ एकजुट हुए किसानो का हौसला बढ़ाने के लिए पंजाब और हरियाणा के कई कलाकार भी पहुंच गए हैं। इनमे कई सिंगर और लोक कलाकार शामिल हैं। ये कलाकार अपने गीतों से किसानो का हौसला बढ़ा रहे हैं।

सिंधु बॉर्डर पर मौजूद अधिकांश किसानो का मानना है कि आंदोलन लंबा चल सकता है। इसलिए वे अपने साथ सभी बदोबस्त करके लाये हैं। इसके अलावा यूथ कांग्रेस तथा अन्य समाजसेवी संस्थाओं ने सर्दी से बचने के लिए कंबल इत्यादि बंटवाए हैं।

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