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किसानो का सरकार को अल्टीमेटम: कृषि कानूनों की वापसी सुनिश्चित करने के लिए तेज होगा आंदोलन

नई दिल्ली। कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीमकोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी के सदस्यों से असहमति जताते हुए आज आंदोलनकारी किसानो ने एक बार फिर सरकार को अल्टीमेटम दिया है। किसान नेताओं ने कहा कि कृषि कानूनों की वापसी सुनिश्चित करने के लिए आंदोलन और तेज किया जाएगा।

सुप्रीमकोर्ट द्वारा कमेटी बनाये जाने को लेकर किसान नेताओं ने कहा कि सरकार जो चाहती थी वही हो रहा है। सरकार चाहती थी कि यह मामला वह सुप्रीमकोर्ट पर डाल दे। अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा, “सरकार जो चाहती है वही हो रहा है। उन्हें मालूम था कि कोर्ट जाकर कमेटी बनवाएंगे। हमें बोला गया कोर्ट में चलो। शुरू से हमें मालूम था कि कमेटी बनेगी कारपोरेट समर्थक लोगों से जो कारपोरेट के खिलाफ नहीं बोलेंगे।”

वहीँ भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन में कोई देश विरोधी बातें कर रहा है तो सरकार उसे गिरफ़्तार करे। कृषि क़ानून कैसे ख़त्म हो सरकार इस पर काम करे। सरकार ने 10 साल पुराने ट्रैक्टर पर बैन लगाया है तो हम 10 साल पुराने ट्रैक्टर को दिल्ली की सड़कों पर चला कर दिखाएंगे।

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किसान नेता दर्शनपाल सिंह ने कहा कि हमने 3 क़ानूनों की प्रतियां जलाकर सरकार को संदेश दिया है कि इसी तरह ये बिल एक दिन हमारे गुस्से की भेंट चड़ेंगे और सरकार को क़ानून वापस लेने पड़ेंगे। 18 तारीख को महिलाएं पूरे देश में बाज़ारों में, SDM दफ़्तरों, जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन करेंगी।

आंदोलन कर रहे किसान आज देश भर में लोहड़ी पर कृषि कानूनों की कॉपी जलाएंगे। यूपी गेट पर किसानों की तरफ से कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।

आज किसानो ने लोहड़ी पर्व पर कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं। लोहड़ी पर कृषि कानूनों की प्रतियां जलाते हुए एक किसान ने कहा कि वह अपनी आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों के लिए विरोध कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि उन्हें अपने परिवार से दूर रहने में कोई समस्या नहीं है, क्यों कि वह परिवार के लिए ही ये सब कर रहे हैं।

राहुल गांधी का केंद्र की मोदी सरकार पर हमला

किसान आंदोलन को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 60 से ज्यादा अन्नदाता की शहादत से मोदी सरकार शर्मिंदा नहीं हुई लेकिन ट्रैक्टर रैली से इन्हें शर्मिंदगी हो रही है!

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