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कृषि कानूनों पर SC में सुनवाई: टिकैत बोले “कृषि कानून सरकार ने बनाये हैं वापस भी वही लेगी”

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन को लेकर आज सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि यदि सरकार कृषि कानूनों पर रोक नहीं लगाती तो हम रोक देंगे।

देश की सर्वोच्च अदालत में आज हुई सुनवाई के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि कृषि कानून सरकार ने बनाये हैं, इसलिए वापस भी वही लेगी।

राकेश टिकैत ने कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने किसानों का पक्ष वहां पर रखा। सुप्रीम कोर्ट ने पहली सुनवाई में भी कहा था कि सरकार किसानों के साथ बातचीत करें। कृषि क़ानून केंद्र सरकार ने बनाए हैं तो इसे वापस भी सरकार ही लेगी।”

वहीँ सुप्रीम कोर्ट में नए कृषि क़ानूनों की वैधता पर आज हुई सुनवाई पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तौमर ने कहा कि कृषि सुधार बिलों से संबंधित विषय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है इसलिए इस समय इसपर कोई टिप्पणी करने की कोई आवश्यकता मुझे प्रतीत नहीं होती।

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उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के परिणाम स्वरूप सरकार द्वारा जो कुछ करने योग्य था, वो सरकार ने चर्चा के माध्यम से भी किया और किसानों की बात को समझकर जो आवश्यक संशोधन किए जा सकते हैं, उनपर भी विचार का प्रस्ताव किसान यूनियनों के सामने रखा है।

वहीँ हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने कहा कि कृषि क़ानूनों के लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। उन्होंने कल भी बुलाया है। मुझे लगता है कि कल सुप्रीम कोर्ट निर्णय लेगा और कोई रास्ता निकलेगा। मैं कांग्रेस से निवेदन करता हूं कि वे किसानों को उकसाने का काम न करें।

कांग्रेस ने सरकार पर बोला हमला:

वहीँ इस मामले में कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि आपसे नहीं होता तो हम कृषि क़ानूनों पर रोक लगा देते हैं। PM को देश के सामने आकर कृषि क़ानूनों को रद्द करने की घोषणा करनी चाहिए। मोदी सरकार क़ानूनों में 18 संशोधन करने के लिए तैयार है, साफ़ है कि ये क़ानून ग़लत हैं।

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि मैं तो शुरू से कह रहा हूं कि 3 नए कृषि क़ानून लेकर आए हैं, तो MSP पर चौथा भी ले आएं। अगर MSP से कम पर कोई भी खरीदेगा तो उसमें सज़ा का प्रावधान कर दीजिए। वही आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा। ये कृषि क़ानून किसानों के हित के लिए नहीं हैं।

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मंगलवार को आएगा सुप्रीमकोर्ट का फैसला:

कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीमकोर्ट ने आज सभी याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने आज सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला मंगलवार तक के लिए सुरक्षित रखा है। मंगलवार को सुप्रीमकोर्ट का फैसला आने के बाद किसान आगे की रणनीति तय करेंगे।

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