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शाहीन बाग़: प्रदर्शनकारियों को खाना उपलब्ध कराने के लिए इन्होने बेच दिया अपना फ्लेट

नई दिल्ली। दिल्ली के शाहीन बाग़ में नागरिकता कानून के खिलाफ पिछले 55 दिनों से चल रहे प्रदर्शन के दौरान धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों के लिए खाने का इंतजाम करना एक बड़ी मुश्किल थी।

शुरू में प्रदर्शन का मैनेजमेंट कर रहे लोगों ने आपस में चंदा करके खाने का इंतजाम किया लेकिन जब प्रदर्शन में दिल्ली से बाहर के लोगों की तादाद बढ़ना शुरू हुई तो प्रदर्शनकारियों की तादाद के हिसाब से खाना बनवाने में लोगों के पसीने छूटने लगे और प्रतिदिन कई सौ लोगों को खाना खिलाने में मुश्किलें आने लगीं।

इस दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के वकील डीएस विन्द्रा सामने आये और प्रदर्शनकारियों के लिए लंगर चलाने की ज़िम्मेदारी उन्होंने अपने कंधे पर ली। विन्द्रा की देखरेख में प्रतिदिन करीब हज़ार- बारह सौ लोगों के लिए लंगर बनने लगा।

जब विन्द्रा को लगा कि यह प्रदर्शन जल्द खत्म होने वाला नहीं है और अभी यह प्रदर्शन काफी समय तक चल सकता है तो उन्होंने लंगर के इंतजाम के लिए अपना फ्लेट बेचकर पर्याप्त पैसो का जुगाड़ किया। जिससे कम से काम दो महीने तक लंगर की व्यवस्था की जा सके।

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डीएस विन्द्रा ने शुरुआत में मुस्तफाबाद और खुरेजी में चल रहे प्रदर्शन में लंगर की व्यवस्था का काम संभाला था, लेकिन यहाँ प्रदर्शनकारियों की तादाद शाहीनबाग की तुलना में काफी कम थी। शाहीन बाग़ में प्रदर्शनकारियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए विन्द्रा ने शाहीन बाग़ का लंगर संभालने का फैसला किया और वे शाहीन बाग़ चले आये।

एक चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में वकील डीएस विन्द्रा ने कहा कि शाहीन बाग़ में सभी समुदाय के लोग लंगर चलाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग अपनी मर्जी से कई सामान ले आते हैं, कोई रिफाइंड का टिन ले आता है तो कोई सब्ज़ी ले आता है। हम किसी से कोई नगद पैदा नहीं ले रहे। लंगर में जो भी ज़रूरत पड़ती है उसे वे ख़ुशी से पूरा करते हैं।

विन्द्रा आम दिनों में गुरुद्वारों में भी लंगर लगवाते रहते हैं लेकिन शाहीन बाग़ का प्रदर्शन शुरू होने के बाद उनका कहना है कि यहाँ भी लोगों को खाना खिलाना पुण्य का काम है।

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