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क्या बीजेपी के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर गैर कोंग्रेसी दलों का मोर्चा बना रहीं ममता?

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने दिल्ली दौरे के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात नहीं करेंगी। हालांकि वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मुलाकात के लिए मुंबई जा रही हैं।

ममता बनर्जी 30 नवंबर को मुंबई जा रही हैं। वे 1 दिसंबर को भी मुंबई में ही मौजूद रहेंगी। अपने मुंबई प्रवास के दौरान ममता बनर्जी एनसीपी सुप्रीमो शरद यादव से मुलाक़ात करेंगी। वे शिवसेना सुप्रीमो और महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे से भी मुलाकात करेंगी।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात न करने के सवाल पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि फिलहाल पंजाब चुनाव को देखते हुए वे लोग काफी व्यस्त हैं। इस कारण उन्होंने मिलने का समय भी नहीं मांगा था। जब ममता बनर्जी से सोनिया से मुलाकात को लेकर कई बार सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे अपने जबाव से सभी को संतुष्ट नहीं कर सकतीं।

वहीँ एक सवाल के जबाव में ममता बनर्जी ने कहा कि वे वाराणसी भी जाएंगी। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव को लेकर ममता बनर्जी ने कहा कि वे समाजवादी पार्टी की मदद को तैयार हैं। यदि समाजवादी पार्टी ने मदद मांगी तो वे ज़रूर करेंगी।

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इस बीच इस तरह की खबरें भी आ रही हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी चाहती हैं कि बीजेपी के खिलाफ गैर कोंग्रेसी दलों का मोर्चा तैयार किया जाए और वे एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार से मुलाकात के दौरान इस मुद्दे पर बात करेंगी।

हालांकि गैर कोंग्रेसी दलों के मोर्चे को लेकर शरद पवार पिछले दिनों कह चुके हैं कि कांग्रेस को इग्नोर नहीं किया जा सकता। वह सबसे पुरानी पार्टी है। जबकि यूपीए के नेतृत्व को लेकर शिवसेना कई बार शरद पवार का नाम आगे करती रही है।

ममता बनर्जी ने अपने दिल्ली दौरे के दौरान दो कांग्रेस नेताओं अशोक तंवर और कीर्ति आज़ाद को तृणमूल कांग्रेस में शामिल करके अपने मंसूबे ज़ाहिर कर दिए हैं। इससे पहले महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुष्मिता देव भी कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो चुकी हैं।

माना जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस को बंगाल से बाहर अन्य राज्यों में खड़ा करने की कवायद के तहत ममता बनर्जी की नज़रें कांग्रेस के उन बड़े नेताओं पर टिकीं हैं जिन्हे जी-23 समूह कहा जाता है। जो पार्टी नेतृत्व की आलोचना करने के लिए हाशिये पर धकेल दिए गए हैं। इन नेताओं में गुलाम नबी आज़ाद, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, विवेक तन्खा, मनीष तिवारी, मुकुल वासनिक आदि के नाम शामिल हैं।

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फिलहाल देखना है कि 2024 के आम चुनाव में बीजेपी को परास्त करने के लिए चुनाव से पहले विपक्ष के बीच किसी तरह की सहमति बन पाती है अथवा सभी दल एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे।

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