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क्या किसान के खिलाफ किसान खड़ा करने जा रही बीजेपी ?

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ आज 12 वे दिन भी किसान आंदोलन जारी रहा। मंगलवार, 8 दिसंबर को किसान संगठनों ने भारत बंद का एलान किया है। भारत बंद का पंजाब के अलावा दिल्ली से सटे हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ा असर दिख सकता है।

वहीँ किसानो से पांच बार बातचीत के बाद भी कोई हल न निकलने के बावजूद 9 दिसंबर को एक बार फिर किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच बातचीत होगी।

इस बीच आज कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तौमर से मुलाकात के लिए किसानो के एक प्रतिनिधिमंडल को भेजा गया। इस प्रतिनिधिमंडल में 20 लोग शामिल थे। बताया जा रहा है कि इस प्रतिनिधिमडंल ने कृषि मंत्री से मुलाकात कर कृषि कानूनों को किसानो के हित में बताते हुए कृषि कानूनों का समर्थन किया है। इस प्रतिनिधिमंडल में कुछ किसान संगठनों के पदाधिकारी मौजूद थे।

इस प्रतिनिधिमडंल में शामिल हुए प्रोग्रेसिव किसान क्लब, सोनीपत के अध्यक्ष कंवलसिंह चौहान ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि कृषि कानूनों का विरोध करने वालो को भ्रमित किया गया है, प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि नए कृषि कानूनों से मंडियां और न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएसपी) दोनों जारी रहेंगे।

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कृषि कानूनों के विरोध में किसानो के भारतबंद के आयोजन से ठीक एक दिन पहले कृषि कानूनों का समर्थन करने वाले बेनामी किसान संगठनो के प्रतिनिधिमंडल को कृषि मंत्री से मुलाकात कराये जाने के बाद यह तो साफ़ हो गया है कि सरकार अभी भी कृषि कानूनों पर पीछे हटने को तैयार नहीं है और वह कृषि कानूनों के पक्ष में किसानो के कुछ बेनामी संगठनों को आगे कर सकती है।

भारत बंद के एक दिन पहले भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष पर हमला करने के लिए अपनी पूरी टीम विपक्ष लगा दी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, कृषि मंत्री कमल पटेल, केंद्रीय मंत्री रविशकर प्रसाद सहित कई नेताओं ने किसान आंदोलन को लेकर विपक्ष को जमकर कोसा।

जानकारों की माने तो 9 दिसंबर को होने वाली किसानो और सरकार की बातचीत में भी पुरानी बैठकों की तरह कोई ठोस नतीजा मुश्किल है। यदि सरकार कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए तैयार होती तो 5 बैठकों की आवश्यकता नहीं पड़ती और अब तक मामला हल हो गया होता।

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