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उपचुनाव के परिणामो पर निर्भर है सिंधिया का भविष्य, हाशिये पर धकेलने की तैयारी में शिवराज

नई दिल्ली (राजा ज़ैद)। मध्य प्रदेश में सिंधिया समर्थक 22 विधायकों द्वारा कांग्रेस से बगावत के बाद बीजेपी में शामिल होने से राज्य में बीजेपी की सरकार तो बन गई लेकिन पिछले दिनों मंत्रिमंडल विस्तार में ज्योतिरादित्य सिंधिया सिंधिया के दबाव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ी।

हालांकि जिन सिंधिया समर्थको को मंत्रिपद दिया गया है, वे अभी विधायक भी नहीं हैं और उनका मंत्रिपद तभी पक्का हो पायेगा जब वे उपचुनाव में फिर से जीतकर आएंगे, लेकिन सिंधिया के दबाव के आगे मुख्यमंत्री शिवराज को नतमस्तक होना पड़ा और मंत्रिमंडल में अपने चहेतो को किनारे रख अहम विभाग सिंधिया समर्थको को देने पड़े।

वहीँ दूसरी तरफ कांग्रेस विधायकों के विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफे देने का क्रम जारी है और अब तक तीन विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। मान जा रहा है कि यह सिलसिला अभी आगे भी जारी रह सकता है।

कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के पीछे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की बड़ी रणनीति को कारण बताया जा रहा है। दरअसल बीजेपी चाहती है कि सिंधिया के प्रभाव से दूर कुछ और कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे कराकर उन्हें बीजेपी में शमिल किया जाए और उपचुनाव में बीजेपी के टिकिट पर उन्हें चुनाव लड़ा कर जिताया जाए। जिससे कि अधिक सीटों पर उपचुनाव कराया जा सके।

सूत्रों की माने तो बीजेपी का लक्ष्य 30 सीटों पर उपचुनाव कराये जाने का है। अब तक 27 सीटें रिक्त हो चुकी हैं। इनमे सिंधिया के साथ बीजेपी में गए 22 विधायकों, बीजेपी विधायको के निधन से खाली हुई दो सीटें और हाल ही में कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए तीन विधायकों की सीटें शामिल हैं।

आज की स्थति देखें तो मध्य प्रदेश में कुल 27 सीटों पर उपचुनाव होना है इनमे से 22 सीटें वे हैं जो सिंधिया समर्थक विधायकों के इस्तीफे से खाली हुई हैं। सूत्रों के मुताबिक यदि सिंधिया समर्थन 22 पूर्व विधायको में से आधे भी उपचुनाव में फिर से जीतकर आते हैं तो भी शिवराज सरकार को बहुमत के लिए सिंधिया समर्थक विधायकों पर निर्भर रहना पड़ेगा।

मध्य प्रदेश में बीजेपी के पास फिलहाल 107 विधायक हैं और उपचुनाव के बाद उसे बहुमत के लिए 116 सीटें चाहिए। यानि कि बीजेपी को अपने दम पर सत्ता में बने रहने के लिए 9 सीटों की आवश्यकता है। ऐसे में मुख्यमंत्री शिवराज की कोशिश होगी कि 9 ऐसी सीटें जीती जाएँ जिनका सिंधिया से कोई रिश्ता न हो और सत्ता में बने रहने के लिए सिंधिया समर्थक विधायकों का मूँह न देखना पड़े।

जानकारों की माने तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके करीबी बीजेपी नेता एक रणनीति के तहत मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया की ताकत को कम करना चाहते हैं। इसलिए फिलहाल यह तो तय है कि ग्वालियर-चंबल के इलाके की 16 सीटों पर बीजेपी ख़ास ध्यान नहीं देगी बल्कि उसकी कोशिश अन्य इलाको में उन सीटों को जीतने की रहेगी, जिन पर सिंधिया समर्थक उम्मीदवार नहीं होंगे।

हालांकि अभी उपचुनाव को लेकर असमंजस की स्थति बनी हुई है। चुनाव आयोग ने फिलहाल सभी उपचुनावों को स्थगित कर दिया है। इसलिए माना जा रहा है कि सितंबर या अक्टूबर तक की उपचुनाव कराये जाएंगे। जैसे जैसे उपचुनाव का समय करीब आएगा, वैसे वैसे मध्य प्रदेश की राजनीति भी करवट बदलेगी।

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