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जारी रहेगा किसान आंदोलन, दिल्ली पुलिस ने कहा “कल की घटना को गंभीरता से लिया, कार्रवाही करेंगे”

नई दिल्ली। 26 जनवरी को किसान परेड के दौरान हिंसा के बाद टिकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर और गाज़ीपुर में किसान आंदोलन अभी भी जारी है। आज किसान नेताओं ने एक सुर में मंगलवार को किसान परेड में हुई हिंसा के लिए सीधे तौर पर सरकार और दिल्ली पुलिस को ज़िम्मेदार ठहराया है।

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि कल दिल्ली में ट्रैक्टर रैली काफी सफलतापूर्वक हुई। अगर कोई घटना घटी है तो उसके लिए पुलिस प्रशासन ज़िम्मेदार रहा है। कोई लाल किले पर पहुंच जाए और पुलिस की एक गोली भी न चले। यह किसान संगठन को बदनाम करने की साजिश थी। किसान आंदोलन जारी रहेगा।

वहीँ अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि किसान आंदोलन को पहले दिन से ही बदनाम करना शुरू किया गया। 70 करोड़ किसान जो मेहनत कर देश को अन्न देता है वह देशद्रोही है, इस तरह देशद्रोही बोलने की हिम्मत किसकी होती है, जो देशद्रोही होता है, वही किसानों को देशद्रोही बोलते हैं।

किसान संगठनों ने 1 फरवरी को प्रस्तावित संसद मार्च स्थगित करने का ऐलान किया है। बुधवार को सिंघु बॉर्डर पर किसान नेता भारतीय किसान यूनियन (आर) के बलबीर राजेवाल ने संसद मार्च स्थगित करने की घोषणा की। 30 जनवरी को शहीदी दिवस पर एक दिन का व्रत रखेंगे और पूरे भारत में सार्वजनिक रैलियाँ करेंगे। अगला कार्यक्रम अगली मीटिंग में तय किया जाएगा।

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हरियाणा विधानसभा से इस्तीफा देने वाले इंडियन नेशनल लोकदल के विधायक अजय चौटाला ने आज कहा कि जो किसान नेता आंदोलन की अगुवाई कर रहे थे उनके खिलाफ केंद्र सरकार ने मुकदमे दर्ज़ किए। कल दिल्ली में जो हुआ वह केंद्र सरकार की साजिश थी।

किसानो में फूट पड़ी, चिल्ला बॉर्डर पर आंदोलन समाप्त:

कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले दो महीने से चल रहे किसान आंदोलन में अब फूट पड़ती दिखाई दे रही है। 26 जनवरी को किसान ट्रेक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के बाद चिल्ला बॉर्डर पर चल रहा किसान आंदोलन समाप्त हो गया है। भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने चिल्ला बॉर्डर से अपना कृषि क़ानूनों के खिलाफ आंदोलन को खत्म कर दिया है।

भारतीय किसान यूनियन (भानु) के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने चिल्ला बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन को समाप्त करने का एलान करते हुए कहा कि मैं कल की घटना से इतना दुखी हूं कि इस समय मैं चिल्ला बॉर्डर से घोषणा करता हूं कि पिछले 58 दिनों से भारतीय किसान यूनियन (भानु) का जो धरना चल रहा था उसे खत्म करता हूं।

कल की घटना को गंभीरता से ले रहे हैं, कार्रवाही करेंगे: दिल्ली पुलिस

वहीँ किसान परेड के दौरान हुई हिंसा और लाल किले पर धार्मिक ध्वज फहराए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने कहा है कि हमने कल की घटना को गंभीरता से लिया है और हम इस मामले में कार्रवाही करेंगे।

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दिल्ली के पुलिस आयुक्त एस एन श्रीवास्तव ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि 2 जनवरी को दिल्ली पुलिस को ज्ञात हुआ कि किसान 26 को ट्रैक्टर रैली करने जा रहे है। हमने किसानों से कहा कि कुंडली, मानेसर, पलवल पर ट्रैक्टर मार्च निकाले। लेकिन किसान दिल्ली में ही ट्रैक्टर रैली निकालने पर अडिग रहे।

उन्होंने कहा कि किसानों ने कल पुलिस के द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए पुलिस बैरिकेड तोड़कर हिंसक घटनाएं की। कुल मिलाकर 394 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और कुछ पुलिसकर्मी ICU में भी है।

श्रीवास्तव ने कहा कि हम दिल्ली में गैर-क़ानूनी तरीके से किए गए आंदोलन और उस दौरान हिंसा और लाल किले पर फहराए गए झंडे को बड़ी गंभीरता से ले रहे हैं। हिंसा करने वालों की वीडियो हमारे पास है, विश्लेषण हो रहा है।

उन्होंने कहा कि गाजीपुर में किसान नेता राकेश टिकैत के साथ जो किसान मौजूद थे उन्होंने भी हिंसा की घटना को अंजाम दिया और आगे बढ़कर अक्षरधाम गए, हालांकि पुलिस द्वारा कुछ किसानों को वापस भेजा गया लेकिन कुछ किसानों ने पुलिस बैरिकेड तोड़े और लाल किले पहुंचे।

दिल्ली के पुलिस आयुक्त ने बताया कि पहचान की जा रही है, गिरफ़्तारियां की जाएंगी। अब तक 25 से ज्यादा मामले दर्ज़ किए गए हैं। कोई भी अपराधी जिसकी पहचान होती है, उसे छोड़ा नहीं जाएगा। जो किसान नेता इसमें शामिल हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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