चुनाव में EVM के इस्तेमाल को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा दिल्ली हाईकोर्ट

नई दिल्ली। पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर चुनाव में ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। चुनाव में ईवीएम के इस्तेमाल को चौनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।

उच्चतम न्यायालय बुधवार को जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 61ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर विचार करने को लेकर सहमत हो गया है। जन प्रतिनिधित्व कानून के इस प्रावधान के तहत ही देश में चुनाव में मतपत्र की बजाय इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से मतदान की शुरुआत हुई थी।

प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिवक्ता एमएल शर्मा की दलीलें सुनीं और कहा कि वह उनके मामले को सूचीबद्ध करने पर विचार करेंगे। शर्मा ने ही यह याचिका व्यक्तिगत रूप से दायर की है।

शर्मा ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 61ए, जो ईवीएम के इस्तेमाल की अनुमति देती है, को संसद ने पारित नहीं किया था। इसलिए इस प्रावधान को लागू नहीं किया जा सकता है।

गौरतलब है कि ईवीएम को लेकर समय समय पर राजनीतिक दल आवाज़ उठाते रहे हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के परिणामो के एलान के बाद ही समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने ईवीएम से छेड़छाड़ की संभावना जताई थी। उसके बाद भी कई चुनावो में गैर बीजेपी दल ईवीएम को लेकर सवाल उठा चुके हैं।

हालांकि चुनाव आयोग ईवीएम को लेकर किसी भी तरह की छेड़छाड़ की संभावना के दावों को ख़ारिज करता रहा है। चुनाव आयोग का दावा है कि चुनाव में इस्तेमाल की जाने वाली ईवीएम पूरी तरह ट्रेम्पर प्रूफ हैं और इनसे किसी तरह की छेड़छाड़ संभव नहीं हैं।

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