बड़ी खबर विशेष

अजब है कोरोना की कहानी, कहीं दो हज़ार का चालान तो कहीं रैलियों में लाखो की भीड़

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण को लेकर अलग अलग राज्यों में अलग अलग कहानियां सामने आ रही हैं। दिल्ली में मास्क न लगाने पर दो हज़ार रुपये तक का चालान काटा जा रहा है। जबकि कुछ राज्यों में मास्क न लगाने पर पांच सौ रुपये तक का फाइन है। वहीँ इसके विपरीत चुनाव वाले राज्यों में चुनावी रैलियां लाखो लोगों की भीड़ बनी हैं। इन राज्यों में कोरोना गाइडलाइन का कोई ज़िक्र भी नहीं है।

इतना ही नहीं चुनावी राज्यों असम, पश्चिम बंगाल में सर्वाधिक चुनावी रैलियां आयोजित की गई। इन रैलियों में न नेताओं के मुंह पर मास्क दिखा और न ही जनता के मुंह पर मास्क लगा दिखाई दिया। लाखो की भीड़ जुटाई गई लेकिन मंच से सिर्फ चुनावी बातें हुईं।

रैलियों के दौरान किसी नेता चाहे वह पीएम नरेंद्र मोदी हों या गृह मंत्री अमित शाह या पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, किसी ने रैली में शामिल हुए लोगों से मास्क पहनने की अपील नहीं की। इसके विपरीत असम के स्वास्थ्य मंत्री ने तो एक चैनल से बात करते हुए यहां तक कह दिया कि अब मास्क लगाने की ज़रूरत नहीं है। असम में अभी कोरोना नहीं है।

ये भी पढ़ें:  संसद में सरकार का बयान: राष्ट्रव्यापी NRC को लेकर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ

दूसरी तरफ महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में कोरोना संक्रमण को लेकर राज्य सरकार की तरफ से लोगों को लगातार आगाह किया जा रहा है। सरकार की तरफ से अपील की जा रही है कि लोग मास्क लगाएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

इतना ही नहीं गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान के कई इलाको और दिल्ली में रात का कर्फ्यू लागू किया गया है। इन राज्यों में कोरोना के लिए जारी की गई गाइडलाइन में सामाजिक कार्यक्रमों शादी और अंतिम संस्कार जैसे मौको पर जुटने वाले लोगों की तादाद तय की गई है। कई शहरो में पांच से अधिक लोगों के जमा होने पर पाबंदी के लिए धारा 144 लागू की गई है।

यहां अहम सवाल यही है कि जिन राज्यों में चुनाव चल रहे हैं वहां कोरोना नियमो का पालन क्यों नहीं कराया गया। यह बात सच है कि चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया हैं उन्हें तय समय के अंदर ही कराना पड़ेगा लेकिन क्या कोरोना नियमो के पालन के तहत चुनाव संपन्न नहीं हो सकते थे?

इस बात की क्या गारंटी हैं कि जिन पांच राज्यों में चुनाव (पश्चिम बंगाल में अभी 5 चरण के चुनाव बाकी हैं) हुए हैं वहां चुनाव बाद कोरोना के मरीजों की तादाद नहीं बढ़ेगी ?

अपनी राय कमेंट बॉक्स में दें
सत्य को ज़िंदा रखने की इस मुहिम में आपका सहयोग बेहद ज़रूरी है। आपसे मिली सहयोग राशि हमारे लिए संजीवनी का कार्य करेगी और हमे इस मार्ग पर निरंतर चलने के लिए प्रेरित करेगी। याद रखिये ! सत्य विचलित हो सकता है पराजित नहीं।
ताज़ा हिंदी समाचार और उनसे जुड़े अपडेट हासिल करने के लिए फ्री मोबाइल एप डाउनलोड करें अथवा हमें फेसबुक, ट्विटर या गूगल पर फॉलो करें