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राफेल डील पर कांग्रेस ने सरकार को फिर घेरा, पूछा ‘मिडिल मैंन तक कैसे पहुंचा पैसा’

नई दिल्ली। राफेल डील में बिचौलिए की भूमिका को लेकर फ़्रांस के एक न्यूज़ पोर्टल द्वारा किये गए सनसनी खेज खुलासे को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस ने एक बार फिर सरकार पर नए सिरे से हमला बोला।

शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह आरोप भी लगाया कि इस सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है और सरकारी खजाने को 21,075 करोड़ रुपये की चपत लगी है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील दस्तावेज आखिर मिडिलमैन तक कैसे पहुंचे।

उन्होंने कहा कि 2015 में 36 राफेल की डील 5.06 बिलियन यूरो में तय की गई। इसमें एयरक्राफ्ट के साथ मिलने वाले सभी हथियार भी शामिल थे। इंडियन नेगोशिएशन टीम ने ये कीमत तय की थी।

उन्होंने कहा कि फ्रेंच न्यूज पॉर्टल के हवाले से सामने आए हैं कि राफेल खरीद में भयंकर भ्रष्टाचार हुआ, देशद्रोह हुआ है! मैं दोबारा दोहराता हूँ, देशद्रोह हुआ, देश के हितों से खिलवाड़ हुआ! राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता हुआ व सरकारी खजाने को 21 हजार 75 करोड़ रुपए का चूना लगाया गया!

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सुरजेवाला ने सवाल किया कि क्या ऐसी कोई मीटिंग हुई? क्या ऐसी मीटिंग के बाद ही 10 अप्रैल 2015 को मोदी जी ने 36 राफेल खरीदने का निर्णय किया और HAL को बदलकर एक ‘प्राइवेट इंडस्ट्रियल’ को लगा दिया?

कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भारत सरकार के रेट तय करने के बाद दसॉ एविएशन ने 20 जनवरी 2016 को कंपनी की इंटरनल बैठक रखी। इसमें कंपनी ने 36 राफेल की कीमत 7.87 बिलियन तय कर दी। मोदी सरकार ने 23 सितंबर 2016 को दसॉ की तय की गई कीमत पर डील स्वीकार कर ली। सुरजेवाला ने सवाल किया कि आखिर ऐसी क्या वजह थी, जो रक्षा मंत्रालय के मना करने पर भी 21,075 करोड़ रुपए ज्यादा देकर राफेल डील की गई।

सुरजेवाला ने कहा कि 26 मार्च 2019 को इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने बिचौलिए के पास से एक सीक्रेट दस्तावेज जब्त किया था। उस पर भी कोई जांच नहीं कराई गई कि आखिर बिचौलिए तक दस्तावेज कैसे पहुंचे। उन्होंने पूछा कि डील में नो रिश्वत, नो गिफ्ट, नो इंफ्लूएंस, नो कमीशन और नो मिडिलमैन जैसी शर्तें क्यों नहीं रखी गईं।

सुरजेवाला ने कहा कि मैं आपके समक्ष 4 बातें रखता हूं। 1. साक्ष्यों के सार्वजनिक पटल पर आने के बाद राफेल घोटाले व 21 हजार 75 करोड़ रुपये के प्राईमा फेसी जो साबित होता है, सरकार को और 130 करोड़ देशवासियों को चूना लगाने की पूरे मामले की क्या सार्वजनिक जांच नहीं होनी चाहिए।

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2. क्या ये कागज जो भारत सरकार के सबसे गुप्त कागज हैं, जिनके आधार पर 36 लड़ाकू जहाजों की कीमत का निर्णय होना है, ये कंपनी के दलाल के पास कैसे पहुंच गए, क्यों पहुंच गए, किसने पहुंचा दिए, कैसे पहुंचाए? क्या ये देशद्रोह नहीं? तो फिर देशद्रोह क्या है?

3. हमारे देश में हर रक्षा मसौदे में नो ब्राइबरी,न कोई भ्रष्टाचार,न इनफुलेंस,कोई मिडिल मैन-बिचौलिया-दलाल नहीं व कमीशन व गिफ्ट नहीं, ये शर्त अनिवार्य है। क्या एंटी करप्शन क्लोज़ इसलिए हटाए जा रहे थे कि बाद में भ्रष्टाचार-दलाली-घूसखोरी सामने आए तो जिम्मेदारी निर्धारित ना हो?

4) 24 जून 2014 को एक बिचौलिया दसॉल्ट को पत्र लिखकर ये कैसे कह रहा था वो इंडियन पॉलिटिक्ल हाई कमांड से मीटिंग कराएगा व रक्षा मंत्री भी बदला जाएगा? एक प्राइवेट व्यक्ति देश के सबसे बड़े रक्षा सौदे में मोदी सरकार के बारे ये क्लेम कैसे कर सकता है?

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