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कांग्रेस ने रखा बीजेपी की दुखती रग पर हाथ, कहा ‘बीजेपी बताये RSS को चंदा कहां से मिलता है’

नई दिल्ली। भारत और चीन के सैनिको के बीच हिंसक झडपों में 20 सैनिको की शहादत के बाद चीन को लेकर भारत की राजनीति गर्म हो गई है और आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है।

जहाँ कांग्रेस लगातार चीन द्वारा भारतीय सीमा के अंदर अतिक्रमण का मामला उठाकर केंद्र सरकार पर हमले बोल रही है वहीँ बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कांग्रेस पर यूपीए सरकार के दौरान राजीव गांधी फाउंडेशन के लिए चीन से डोनेशन लेने का आरोप लगाया है। नड्डा ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी पर हमला बोलते हुए दस सवाल भी पूछे हैं।

वहीँ अब बीजेपी के जबाव में कांग्रेस ने पलटवार में बीजेपी से दस सवाल पूछे हैं। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा को, खुद को चुनावी बॉन्ड के जरिए मिले चंदे तथा ‘चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के साथ अपने संबंधों’ के बारे में जवाब देना चाहिए।

सुरजेवाला ने कहा कि चीनी घुसपैठ के मुद्दे पर मोदी सरकार की विफलता से ध्यान भटकाने के लिए भाजपा रोजाना कांग्रेस पर आरोप मढ़ रही है। उन्होंने कहा, दुखद है कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा राष्ट्रीय सुरक्षा और भूभागीय अखंडता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के प्रयासों में अपनी विफलता के चलते अपना राजनीतिक संतुलन खो बैठे हैं।

सुरजेवाला ने दावा किया, ‘भाजपा नेतृत्व को चीन के साथ उसके गहरे संपर्क के बारे में सवाल पूछे जाने पर डर लग रहा है। यह संपर्क ‘चाइना एसोसिएशन फॉर इंटरनेशनल फ्रेंडली कांटैक्ट’ (सीएआईएफसी) के साथ है और चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के साथ उसने लगातार संवाद किया है।’

कांग्रेस ने पूछे ये सवाल:

भाजपा और सीपीसी के बीच क्या संबंध है? सीपीसी के प्रतिनिधिमंडल के दौरे के समय 30 जनवरी, 2007 को तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने दोनों पार्टियों के बीच जिस ऐतिहासिक संबंध की बात की थी वो क्या है?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग जनवरी, 2009 में सीपीसी के न्यौते पर चीन क्यों गये थे और उस वक्त अरुणाचल प्रदेश और तिब्बत के मुद्दे पर चर्चा की गयी थी, जबकि आरएसएस कोई राजनीतिक दल भी नहीं है?

भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष नितिन गडकरी 29 जनवरी, 2011 को सीपीसी के निमंत्रण पर पांच दिनों के लिए चीन क्यों गये थे?’

नवंबर, 2014 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सीपीसी के ‘द पार्टी स्कूल’ में अध्ययन के लिए भाजपा सांसदों-विधायकों के प्रतिनिधिमंडल को वहां क्यों भेजा था?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच बार बतौर प्रधानमंत्री और चार बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में चीन का क्यों दौरा किया?’ क्या वह प्रधानमंत्री के रूप में 6 वर्षों में चीनी राष्ट्राध्यक्ष के साथ 18 बैठकें करने वाले एकमात्र पीएम नहीं हैं? क्या उनकी ‘झूला डिप्लोमेसी’ ने काम किया है?

क्या भाजपा चुनावी बॉन्ड के माध्यम से चंदा देने वालों के नाम घोषित करेगी? क्या भाजपा बातायेगी की आरएसएस को कहां-कहां से चंदा प्राप्त होता है।

भाजपा से संबद्ध सभी संगठन अपने दातदाताओं का नाम सार्वजनिक करेंगे। उनकी सूची में भी कई चीनी मूल के नाम शामिल हैं।

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