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संसद की नई बिल्डिंग से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता: कांग्रेस

नई दिल्ली। बजट सत्र के समापन के बाद लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। संसद के सत्र के समापन के बाद गुरूवार को कांग्रेस नेताओं मल्लिकार्जुन खड़के, जयराम रमेश और रवनीत बिट्टू ने प्रेस कांफ्रेंस में बजट सत्र को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी।

मल्लिकार्जुन खड़के ने कहा कि हमारे सारे प्रमुख नेतागण और खासकर सभी अपोजिशन पार्टी के लीडर्स को इकट्ठा करके हम इस विषय पर लड़े लेकिन यह सरकार किसी चीज़ पर मानने को तैयार नहीं थी।

उन्होंने कहा कि सरकार ने इन 6 सालों में उत्पाद शुल्क और सेस के द्वारा 22 लाख से भी ज्यादा पैसा जमा किया था, उसके बारे में भी हमने उनसे पूछा कि कहाँ, कैसे और किन योजनाओं पर खर्च किया? लेकिन उनका कोई उत्तर नहीं आया।

खड़के ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू जी जब प्रधानमंत्री थे तो सदन में बैठकर सभी की समस्याओं को सुनते थे, देश की समस्याओं का समाधान करने की पूरी कोशिश करते थे। लेकिन आज जो प्रधानमंत्री जी और गृहमंत्री जी हैं, वह सभी चुनाव-प्रचार में व्यस्त हैं; उन्होंने पार्लियामेंट की तरफ झांक कर भी नहीं देखा।

उन्होंने बजट सत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि हमने एफडीआई और निजीकरण दोनों का जमकर विरोध किया, क्योंकि एफडीआई के नाम पर जो देश में पैसा आना था इन्वेस्टमेंट आना था वह दिख नहीं रहा; लेकिन हमने उनके सामने यह जिक्र किया।

वहीँ लोकसभा में कांग्रेस के नेता रवनीत बिट्टू ने कहा कि पहले अंग्रेज हमारे देश से अच्छी चीजें लूटकर ले गए। अब जो बची हैं, वो पिछले 7 साल से निजीकरण के नाम पर चंद लोगों को सौंपी जा रही हैं। मोदी जी और उनकी सरकार इस काम में लगी हुई है।

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उन्होंने कहा कि बीमा गरीब आदमी का सबसे बड़ा सहारा है, उसे भी बड़ी कम्पनियों को, बाहर के लोगों को सौंप रहे हैं। वो हमारे गरीब लोगों के खून-पसीने की कमाई लूटकर ले जाएंगे, क्योंकि वो दान-पुण्य के लिए तो आएंगे नहीं, लाभ कमाने आएंगे।

बिट्टू ने कहा कि बड़े संस्थानों में SC-ST-OBC के पद नहीं भर रहे। डीजल-पेट्रोल की कीमतें धड़ल्ले से बढ़ा रहे हैं। लोकतंत्र के मामले में हमारी पाकिस्तान से तुलना की जा रही है, और प्रधानमंत्री सदन में नहीं आते।

कांग्रेस सांसद ने किसान आंदोलन का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि किसान, गरीब के लिए प्रधानमंत्री के पास समय नहीं है। किसान सीमा पर बैठे हैं, उनकी कोई चिंता नहीं है। 300 से ज्यादा किसान मर चुके हैं, लेकिन उनके पास समय नहीं है। बजट से लोगों को उम्मीदें थीं लेकिन आम आदमी के लिए ये बजट खोखला साबित हुआ है। असंगठित क्षेत्र को हमने 10-10 हजार रुपए देने के लिए कहा था, उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इन्हें सिर्फ चुनाव की चिंता है।

रवनीत बिट्टू ने कहा कि ये बहुमत का नाजायज फायदा उठा रहे हैं। इन चुनावों में हमारी लोगों से अपील है कि भाजपा ने जो गरीब आदमी की कमर तोड़ी है, उसकी सजा इन्हें जरूर दें। इनके झूठे वादों, प्रोपेगैंडा से इन्हें चुनाव मत जीतने देना।

राज्यसभा में कांग्रेस के सांसद जयराम रमेश ने कहा कि यह बजट सत्र वैसे तो 8 अप्रैल को स्थगित होना था। हम चाहते थे कि सत्र 8 तारीख तक चले, जनता के मुद्दे हम उठाएं, चर्चा हो। लेकिन प्रधानमंत्री, गृहमंत्री चुनाव में व्यस्त हैं, इसलिए उन्होंने 2 सप्ताह पहले ही सत्र स्थगित करवा दिया।

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उन्होंने कहा कि इस सत्र में हमने काले-कानूनों का मुद्दा उठाया, पेट्रोल-डीजल-गैस में मूल्य वृद्धि का मुद्दा उठाया। हम इन पर चर्चा करना चाहते थे, लेकिन सरकार नहीं मानी।

जयराम रमेश ने कहा कि इस सत्र में विधेयक पर विधेयक आए और हमारी तरफ से पूरा रचनात्मक सहयोग सरकार को मिला। आज सरकार इसका श्रेय लेगी, लेकिन दोनों सदनों में कांग्रेस सहित विपक्ष के रचनात्मक सहयोग के बिना ये विधेयक पास नहीं होते।

उन्होंने कहा कि जितने भी विधेयक इस सत्र में पारित हुए हैं, उनमें हर एक विधेयक सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज होगा। दिल्ली का कानून, खनिज वाला विधेयक सब चैलेंज होंगे। इस तरीके से विधेयक पारित करना लोकतंत्र के खिलाफ है।

जयराम रमेश ने कहा कि 2014 में CAG ने 55 रिपोर्ट निकाले थे, 2020 में सिर्फ 14 रिपोर्ट निकाले हैं। जिस CAG का ढिंढोरा पीटकर ये सत्ता में आए हैं, आज उसी को नजरअंदाज कर रहे हैं।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि हमने रचनात्मक सहयोग दिया, लेकिन हमारी एक भी मांग पूरी नहीं हुई। हमने कालिंग अटेंशन की मांग की; हमने शार्ट ड्यूरेशन डिस्कशन पर मांग की; हमने काले क़ानूनों पर बहस की मांग की, निजीकरण पर बहस की मांग की लेकिन कुछ भी नहीं माना गया।

जयराम रमेश ने कहा कि संसद की नई बिल्डिंग से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता, पुरानी बिल्डिंग से ही हो सकता है। लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए विपक्ष के मुद्दों पर बहस का मौका मिलना चाहिए।

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