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सुप्रीमकोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी में निकला नया पेंच, कांग्रेस ने उठाये सवाल

नई दिल्ली। कृषि कानूनों की समीक्षा के लिए सुप्रीमकोर्ट द्वारा बनाई गई 4 सदस्यीय कमेटी को लेकर अब नया पेंच फंसता दिखाई दे रहा है। कमेटी के 4 सदस्यों के बारे में कहा जा रहा है कि वे सरकार को पहले ही लिख कर दे चुके हैं कि वे कृषि कानूनो का समर्थन करते हैं।

कांग्रेस ने यह मामला उठाते हुए सवाल दागे हैं। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि आज सुप्रीम कोर्ट ने 4 सदस्य कमेटी भी बनाई और कहा कि यह कमेटी किसानों से वार्तालाप भी करेगी। जो कमेटी बनाई उसका हमने अध्ययन करने का प्रयास किया और वो काफी चौंकाने वाला है, काफी अजीबो-गरीब है।

उन्होंने कहा कि हमने यह पाया कि कमेटी के जो चारों सदस्य हैं उन्होंने तो पहले से ही सार्वजनिक तौर से यह निर्णय कर रखा है और यह बात कही है कि ‘यह तीनों काले कानून सही हैं। किसानों को इस कमेटी से न्याय नहीं मिल सकता। जो पहले से ही मोदी जी और काले कानूनों के साथ खड़े हैं, MSP खत्म करवाने के साथ खड़े हैं। इस पर हर व्यक्ति को सोचना चाहिए और अंतरमंथन करने की जरुरत है

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सुरजेवाला ने कहा कि आठ दौर की वार्तालाप एक महीने से अधिक में सरकार द्वारा केंद्रीय कृषि मंत्री की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी से हुई। सरकार हर बार अपनी ज़िम्मेदारी को टालती रही।

उन्होंने कहा कि श्री राहुल गांधी और श्रीमती सोनिया गांधी जी ने स्पष्ट तौर पर यह कहा था कि यह तीन काले कानून हिंदुस्तान के संविधान पर कुठाराघात हैं, प्रांतों के अधिकार पर कुठाराघात हैं। इन्हें खत्म करना चाहिए, इससे कम कोई और हल मंजूर नहीं।

सुरजेवाला ने कहा कि पहले दिन से ही, जब रात के अंधेरे में यह अध्यादेश आया था तब से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की मांग स्पष्ट है कि यह तीन काले कानून किसान विरोधी हैं और इन्हें फौरी तौर पर खत्म करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने आज तक सांत्वना का एक भी शब्द देश के अन्नदाता, किसानों के लिए नहीं कहा। देश का किसान केवल एक मांग कर रहा है, और वह मांग है- तीन काले कानून खत्म कीजिए।

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि 66 से अधिक किसानों ने अभी तक दिल्ली की सीमाओं पर दम तोड़ दिया है, अपनी कुर्बानी दे दी है। लेकिन प्रधानमंत्री जी का दिल नहीं पसीजा। कोई ऐसा दिन नहीं जाता जब एक से अधिक किसान काल का ग्रास नहीं बन जाता।

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उन्होंने कहा कि 49 दिन से अधिक से लाखों किसान दिल्ली की सीमा पर न्याय की गुहार मांग रहे हैं। देशभर के 62 करोड़ अन्नदाता, गरीब खेत-मजदूर, अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों के लोग, साधारण किसान जगह-जगह आंदोलनरत हैं।

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