बड़ी खबर लाइफ स्टाइल साहित्य

बबिता जोसफ की कविता: मैं भी हूं एक इंसान

मैं भी हूं एक इंसान , तुम्हारी ही तरह उस परमपिता की संतान न जाने किसने छीन ली मुझसे मेरी ही पहचान। न रोटी है ,न कपड़ा है, न है मेरा कोई मकान, जन्मा हूँ फुटपाथ पर जाऊं कहाँ, नहीं है , मेरा कोई मुकाम क्यों है मेरी दुनिया वीरान। कभी मैं समझ न पाया […]

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बबिता जोसफ की कविता: ‘तृण – तृण जोड़ पक्षियों ने दरख़्त में गांव सलोना बसाया है’

बादलों की छांव तले तृण-तृण जोड़ पंछियों ने दरख़्त पर गांव सलोना बसाया था। आंखों में सुंदर ख्वाब सजाया था। असफल प्रयासों में पर्ण तृण , धरा पर कई बार गिराया था। फिर भी धैर्य ,परिश्रम का सबक , सबने गले से लगाया था। हर चुनौती नें हौंसलों का , कद और भी बढ़ाया था। […]

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बबिता जोसफ की कविता: जीवन के काल चक्र में

भव के भव्य रंग मंच में हर शख्स को उसके कर्म विविध किरदार दे जाते हैं। जीवन के काल चक्र में इष्ट-अनिष्ट के संयोग-वियोग कभी हर्षित कभी शोकित कर जाते हैं। किसे तजें किसे भजें तटस्थ भाव से किरदार निभाते हर पात्र जगत से एक दिन विदा हो जाते हैं जीवन सुंदर हो फूलों सा […]

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बबिता जोसफ की कविता: ‘बजे अंश बांस का, वादन के क्षण’

बजे अंश बांस का वादन के क्षण, बहे तेरी सांस , जब मुरली के अंग, स्वरों के स्पंदन से, झरें निर्झर प्रेम कण, झूमे तन प्रिय की धुन ढूंढे उसे प्रेम मुग्ध नयन छूटे सुख-दुःख , जग के बंधन बिसरे सुध-बुध तन और मन बजे हिय में प्रेम की सरगम बसे मन जब प्रेम रतन, […]

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बबिता जोसफ की कविता: श्वास अवरुद्ध, खामोशियों का घोर पहरा है

श्वास अवरुद्ध ,खामोशियों का घोर पहरा है शहर गतिरुद्ध ,तबाहियों का शोर पसरा है। स्तब्ध है मन,सदमों का असर गहरा है लाचार हैं जन,पैरों में ख़ौफ़ जकड़ा है बिछड़े हैं जन पहन अपरस कफन उजड़े हैं अमन , बने निर्झर नयन तप रही धरा, कंप रहा गगन धधक रही चिताऐं , है संतप्त पवन बिखरी […]

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बबिता जोसफ की कविता: हो गया बेबस बहुत आदमी

छोड़ दे दर्प सभी , जाग भी अब ए गिरी पिघल जाए दिल तेरा अब सही बह चले तेरे अश्रुओं से एक नदी हो गया बेबस बहुत अब आदमी मर के भी न मिल रही दो गज जमीं छिप गईं रेत में सब शफरियाँ, सिसक रही कीच में कुमुदनियाँ। मर गईं है अब सब इंद्रियां, […]

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अंजुम बदायूंनी की ग़ज़ल “दिन की ज़ू, शब की चांदनी तुम से”

दिन की ज़ू, शब की चांदनी तुम से यूं समझ लो कि ज़िन्दगी तुम से तुम से फूलों ने दिलकशी सीखी मैं ने सीखी है सादगी तुम से दौरे ज़ुल्मत से क्यूं डरूं आख़िर मेरे आंगन मे रौशनी तुम से तुम हो रंगत मेरे ख़यालो की मेरे अफ़कारे – बाहमी तुम से दिल नवाज़ी के […]

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नम्रता चौहान की कविता “ऑनलाइन शिक्षा मासूमो की परेशानी”

कमर का बोझ हुआ है हल्का आँखों पर आकर ठहरा है बच्चों के तन मन को देखो मोबाईलो ने घेरा है किससे अपना दर्द कहे पीड़ित हैं इस दर्द से ये जब सुनने वाला ही हो गया अंधा बहरा है!! गरीबों के बच्चे क्या ऐसे पढ़ाई कर लेंगे क्या ये मासूम बच्चे रेडिएशन से लड़ […]

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अंजुम बदायूनी की ग़ज़ल: चेहरे पे तेरे तेहरीरें कुछ

ग़ज़ल चेहरे पे तेरे तेहरीरें कुछ होटों पे मगर तफसीरें कुछ आँखों में चमकते ख्वाब कई खामोश मगर ताबीरें कुछ क्यूँ देती हैं दस्तक रह रह कर नजरों में भरी तस्वीरें कुछ है माइले बकशिश शाने खुदा हम भी तो करें तदबीरें कुछ कांधों पे सुनहरा दौर लिए हैं सहमी हुई तकदीरें कुछ फिर शौक […]

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अंजुम बदायूनी की ग़ज़ल: जो तू नहीं तो ज़िंदगी में रंग क्या, कमाल क्या

ग़ज़ल (अंजुम बदायूनी) जो तू नहीं तो ज़िन्दगी मे रंग क्या, कमाल क्या वो *चर्ख़े-सुब्हो-शाम क्या, वो रोज़ो, माहो, साल क्या तरक़्क़ियों का शौक़ क्या, *तनज़्ज़ुली का ख़ौफ़ क्यूं के *मुख़्तसर हयात में *उरूज क्या, *ज़वाल क्या ये तंगो-सख़्त रास्तों पे क्या जुदाई और मिलन *वजूद की हो जंग तो *फ़िराक़ क्या, *विसाल क्या फ़क़ीरे-दिल […]

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सलिल सरोज की ग़ज़ल: निभाना आ गया है

जब से अपना जख्म छिपाना आ गया फिर हम को सब से निभाना आ गया जिन्हें चाहते थे, उनका दीदार हुआ तो बेसब्र बरसात में भी पसीना आ गया जुर्म करने वाले जुर्म करते रहे शौक से दौरे-सज़ा मजलूम पे निशाना आ गया वो दिन- रात हक़ की पैरवी करता रहा पर लोग कहते हैं […]

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सलिल सरोज की कविता: तेरे शहर में फिर से आना चाहता हूं मैं

तेरे शहर में फिर से आना चाहता हूँ मैं मेरा दिल फिर से जलाना चाहता हूँ मैं जो आग लगी लेकिन फिर बुझी नहीं उसी राख से धुआँ उठाना चाहता हूँ मैं इक दरख्त पे अब भी तेरा मेरा नाम है उसे अब शाख से मिटाना चाहता हूँ मैं तेरे नाम के किताबों में जो […]

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पुस्तक समीक्षा: बच्चों के लिए भारत का संविधान : सुभद्रा सेन गुप्ता

ब्यूरो(उपासना बेहार)। वर्तमान समय में संविधान और उसके महत्व को समझना सबसे जरुरी हो गया है. भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है जो 22 भागों में विभजित है, इसमें 395 अनुच्छेद एवं 12 अनुसूचियां हैं. जिसे तैयार करने में 2 साल, 11 माह और 18 दिन का समय लगा. देश के […]

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उफ़ ! तमिल पुलिस का वहशीपन

जयराज और फ़ेनिक्स की निर्मम हत्या के विरोध में  ( मोहम्मद ख़ुर्शीद अकरम सोज़ ) ————————————- मेरी आँखों के आगे कुछ ख़ूनी मंज़र नाच रहे हैं ! एक वो मंज़र जिसमें जॉर्ज फ़्लायड को गला घोंट कर अमेरिकी पुलिस ने मार दिया और पस-मंज़र में उसकी चीख़ें, “मैं साँस नहीं ले सकता हूँ !” यह […]