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किसान आंदोलन के समर्थन में 36 ब्रिटिश सांसदों ने ब्रिटेन सरकार को पत्र लिखा

लंदन। किसान आंदोलन की गूंज अब अन्य देशो तक पहुंच गई है। कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन में किसान आंदोलन के समर्थन में भारतीय लोगों ने प्रदर्शन कर कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की वहीँ

इससे पहले नाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के बाद अब ब्रिटेन के सांसदों ने भी भारत के कृषि कानूनों पर चिंता जताने के बाद अब 36 ब्रिटिश सांसदों ने ब्रिटेन सरकार को पत्र लिखकर कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए भारत सरकार पर दबाव बनाने की मांग की है।

लेबर पार्टी के सांसद तनमनजीत सिंह धेसी के नेतृत्व में 36 ब्रिटिश सांसदों ने ब्रिटिश विदेश सचिव डॉमिनिक राब को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में सांसदों ने किसान कानून के विरोध में भारत पर दबाव बनाने की मांग की गई है।

पत्र में कहा गया है कि भारत सरकार द्वारा कोरोना वायरस के बावजूद लाए गए तीन नए कृषि कानूनों में किसानों को शोषण से बचाने और उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने में विफल रहने पर देश भर में व्यापक किसान विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

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ब्रिटिश सांसदों ने राष्ट्रमंडल कार्यालय को पत्र लिखकर कहा कि इन कृषि कानूनों से पंजाब के किसानों को भारी समस्या पैदा हो गई है। वे इसे अपने लिए ‘डेथ वारंट’ मान रहे हैं और इसके खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। यह ब्रिटेन में सिखों और पंजाब से जुड़े लोगों के लिए विशेष रूप से चिंता का विषय है।

वहीँ दूसरी तरफ दिल्ली के विज्ञान भवन में आज किसानो और सरकार के बीच पांचवी बात बातचीत हो रही है। किसान संगठन कृषि कानूनों को पूरी तरह रद्द करने की मांग कर रहे हैं। अब तक हुई चार बार बातचीत में कोई हल नहीं निकल सका है। किसानो ने पांचवे दौर की बातचीत शुरू होने से पहले चेतावनी दी है कि यदि आज भी बातचीत में कोई हल नहीं निकलता तो 8 दिसंबर को भारत बंद किया जायेगा।

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