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गांव की हिफाज़त का हवाला दे बसंती ने पति को भेजा क्वारेंटाइन सेंटर

पटना ब्यूरो (फ़ौजिया रहमान ख़ान): महिलाएं अगर जागरूक हों तो व न सिर्फ एक परिवार बल्कि पूरे समाज का ख्याल कर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करती हैं। ऐसी महिलाओं में एक बसंती देवी भी हैं।

रोजगार के लिए परदेस गये अपने पति के कोरोना संकटकाल के दौरान लौटने पर बसंती देवी उसे क्वारेंटाइन सेंटर ले गयीं और अपनी मौजूदगी में स्क्रीनिंग भी कराया। चिकित्सकों द्वारा होम क्वारेंटाइन की सलाह दिये जाने के बाद वह पति को लेकर घर वापस आयी, सख़्ती से हाथ धोने व व्यक्तिगत साफ सफाई रखने के नियमों का पालन करवाया और पति को बाहर निकलने पर रोक भी लगा दिया।

जिला के आमस प्रखंड के ह्रदयचक गांव की निवासी बसंती बताती हैं उनके पति अशोक ने जब उड़ीसा से अपने आने की सूचना फोन के माध्यम से दी तो घर वाले परेशान हो गये थे। कोरोना बीमारी के बारे में सबको पता होने की वजह से कोई भी बाहरी व्यक्ति का बिना जांच आना सभी गांव वालों के लिए खतरा था। उन्होंने पति को फोन के माध्यम से ही निकट के क्वारेंटाइन सेंटर की जानकारी देकर उसे वहां पहुंचने के लिए कहा ताकि गांव वाले भी किसी बीमारी के शिकार नही हों।

महिलाओं की जागरूकता आयी काम:

अशोक को क्वारेंटाइन सेंटर ले जाने में बंसती देवी की मदद करने वाली महिलाओं में अनीता व अंजू भी हैं। ये वे जागरूक महिलाएं हैं जो यह समझती हैं कि कोरोना से बचाव का सबसे सशक्त माध्यम नियमों का पालन करना व बीमारी के प्रति जागरूकता ही है।

अनीता बताती हैं गांव की औरतों ने हमेशा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि लोग साबुन से नियमित अपने हाथ धोने की आदत डालें और घर से बाहर निकलने पर मास्क या गमछा से मुंह नाक ढंकें। साथ ही शारीरिक दूरी के नियमों का पालन कर बीमारी से बचाव करें। वहीं अंजू देवी कहती हैं गांव में जो भी आये उसे पहले स्वास्थ्यकेंद्र भेजा जाना जरूरी था ताकि बीमारी का इलाज उसके फैलने से पहले ही किया जा सके।

होम क्वारेंटाइन कर दिया गया शपथ पत्र:

क्वारेंटाइन सह सहायता केंद्र के प्रभारी वीरेंद्र कुमार चौधरी बताते हैं बीते माह एक जून की शाम बसंती अपने पति को लेकर केंद्र पर पहुंची। पति के उड़ीसा के आने की बात कह उसे क्वॉरेंटाइन सेंटर में रखने के लिए कहा। पहले तो यहां मौजूद चिकित्सकों ने उसकी आवश्यक जांच की लेकिन संक्रमण के कोई लक्षण नहीं पाकर उसे होम क्वारेंटाइन की सलाह दी गयी। साथ ही आवश्यक नियमों की जानकारी व उसके पालन करने की बात कह एक शपथ पत्र भी दिया गया।

बेटा को देख मां की आखों से छलक आये आंसू:

अशोक की मां मालती देवी के आंखों में आंसू उसकी खुशी को ब्यां करते हैं। वह बताती हैं बेटा के आने के बाद वह यह नहीं समझ पा रहीं थीं कि क्या किया जाये। लेकिन जब डॉक्टरों ने बताया कि उसे कोई बीमारी नहीं है तो वह घर आ गया। वह गांव की महिलाओं से मिली मदद के लिए शुक्रिया कह चेहरे पर मुस्कान के साथ कहती हैं सारी बहुएं बसंती की तरह जागरूक हो जायें।

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