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बैंक डिटेल्स, पैन और भूमि राजस्व रसीद जैसे दस्तावेजों से साबित नहीं होती नागरिकता: हाईकोर्ट

गुवाहाटी। असम में एक महिला द्वारा विदेशी न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) ने महिला को “विदेशी नागरिक” की श्रेणी में रखा है।

कोर्ट ने महिला की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ‘ बैंक खातों का विवरण, पैन कार्ड और भूमि राजस्व रसीद जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल नागरिकता साबित करने के लिए नहीं किया जा सकता है।’ जबकि असम प्रशासन द्वारा स्वीकार्य दस्तावेजों की सूची में भूमि और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेजों को रखा गया है।

ज़ुबैदा बेगम द्वारा दायर याचिका पर गुवाहटी हाई कोर्ट ने कहा कि “यह कोर्ट पहले की कह चुकी है कि पैन कार्ड और बैंक खाते नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं। भूमि राजस्व भुगतान रसीद किसी व्यक्ति की नागरिकता को साबित नहीं करता है। इसलिए हमने पाया है कि न्यायाधिकरण ने अपने सामने रखे गए साक्ष्यों को सही ढंग से समझा है।”

हाईकोर्ट और न्यायाधिकरण ने कहा कि महिला ने अपने पिता और पति की पहचान घोषित करने के लिए गांव के मुखिया द्वारा जारी किया एक प्रमाण पत्र समेत 14 दस्तावेज विदेशी न्यायाधिकरण को दिए थे लेकिन वह खुद को अपने परिवार से जोड़ने का कोई भी दस्तावेज दिखाने में नाकाम रही।

बता दें कि जुबैदा बेगम उर्फ जुबैदा खातून ने विदेशी न्यायाधिकरण के खुद को विदेशी घोषित करने के आदेश को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

हालाँकि असम में एनआरसी को लेकर सरकार का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को तब तक डिटेंशन सेंटर नहीं भेजा जाएगा जब तक उसके सारे कानूनी विकल्प समाप्त नहीं हो जाते हैं।

गौरतलब है कि असम में एनआरसी की अंतिम सूची में करीब 19 लाख लोगों के नाम गायब हैं। जिन लोगों के नाम एनआरसी की लिस्ट में शामिल नहीं हैं, उन्हें अपनी नागरिकता शामिल करने के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा कराने होंगे।

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