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एनडीए से अलग हो सकता है अकाली दल

नई दिल्ली। कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सरलीकरण) अध्यादेश, किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन समझौता और कृषि सेवा अध्यादेश और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश का विरोध कर रहे सरकार के सहयोगी अकाली दल की केबिनेट मंत्री हरसिमरत कौर के इस्तीफे के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या अकाली दल एनडीए से अपना नाता तोड लेगा या नहीं।

हालांकि अकाली दल के सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद भी मोदी सरकार पर किसी तरह का कोई खतरा नहीं है। शिरोमणि अकाली दल के लोकसभा में दो सांसद हैं जबकि राज्यसभा में तीन सांसद हैं।

अकाली दल द्वारा केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेने के सवाल पर सुखबीर सिंह बादल ने कहा है कि वह पार्टी की बैठक में इस बात का फैसला करेगी। वहीँ जानकारों की माने तो कृषि अध्यादेश के मुद्दे पर अकाली दल के बाद एनडीए के कई अन्य दल भी सरकार के खिलाफ खड़े हो सकते हैं।

इतना ही नहीं जानकारों के मुताबिक कृषि अध्यादेश पर सरकार विरोधी गूंज बिहार के विधानसभा चुनाव और मध्य प्रदेश में 27 सीटों के उपचुनाव में बीजेपी के लिए मुश्किलें पैदा करने वाली है।

ऐसे में यह भी तय माना जा रहा है कि सरकार कृषि अध्यादेश पर लचीला रुख दिखाए और इनमे कुछ संशोधनो को जोड़े। फिलहाल यह भी कहा जा रहा है कि कृषि अध्यादेश को लेकर देशभर में किसान आंदोलनों की शुरुआत हो सकती है।

कोरोना संक्रमण और चीन से चल रही तनातनी के बीच देश की अर्थव्यवस्था और बढ़ती बेरोज़गारी को लेकर विपक्ष पहले ही सरकार पर हमलावर है। कृषि अध्यादेशों के बहाने विपक्ष को सरकार के खिलाफ एक और बड़ा हथियार मिल गया है।

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