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देर रात अहमद पटेल और उद्धव ठाकरे की हुई बात, तैयार हो रहा कॉमन मिनिमम प्रोग्राम

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के बाद भी नई गैर बीजेपी सरकार बनाने के लिए कोशिशें जारी हैं। सूत्रों की माने तो कल देर रात मुंबई में कांग्रेस नेता अहमद पटेल और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच बैठक हुई।

सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए कॉमन मिनिमम प्रोग्राम को लेकर बातचीत हुई। कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने उद्धव ठाकरे को कांग्रेस के विचारो से अवगत करा दिया है और उन्हें साझा न्यूनतम कार्यक्रम तैयार करने के लिए कहा है।

वहीँ दूसरी तरफ कांग्रेस और एनसीपी नेताओं के बीच भी देर रात तक चर्चा जारी रही। सूत्रों की माने तो शिवसेना द्वारा तैयार किये जाने वाले कॉमन मिनिमम प्रोग्राम को देखने के बाद ही एनसीपी और कांग्रेस आपस में चर्चा करके अंतिम निर्णय लेंगी।

कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के बाद होगा फैसला:

कल पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा था कि कल कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्षा का शिवसेना की तरफ से पहली बार आधिकारिक तौर पर फोन किया गया था लेकिन यह गठबंधन के दूसरे दल से बात किए बिना तय नहीं किया जा सकता था।

अहमद पटेल ने कहा कि पहले हमारी बात हो जाए, सारी बातें क्लियर हो जाएं। तब हम शिवसेना से भी बात कर लेंगे। एनसीपी से बात के बाद शिवसेना से बातचीत की कोशिश जल्द होगी। न्यूनतम साझा कार्यक्रम के मुद्दों पर स्पष्टीकरण जरूरी है।

वहीँ एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि हमें कोई जल्दी नहीं है। पहले हम गठबंधन के दलों के बीच सभी बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करेंगे और इसके बाद शिवसेना से भी बातचीत की जाएगी। उनसे भी सभी बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी और उसके बाद ही सरकार बनाने के बारे में आगे कोई फैसला लिया जाएगा।

शरद पवार ने भी कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की आवश्यकता बताते हुए कहा कि अहम फैसला लेने से पहले जरूरी था कि सभी बिंदुओं पर स्पष्टीकरण होना चाहिए।

सुप्रीमकोर्ट पहुंची शिवसेना:

वहीँ शिवसेना ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शिवसेना की तरफ से सुप्रीमकोर्ट में दायर की गयी याचिका में कहा गया है कि “राज्यपाल ने महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए बहुमत साबित करने के वास्ते तीन दिन का भी समय देने से इनकार कर दिया।”

याचिका में, शिवसेना ने तर्क दिया है कि राज्यपाल का निर्णय संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया, “यह स्पष्ट तौर पर शक्ति का मनमाना, अतार्किक एवं दुर्भावनापूर्ण प्रयोग है ताकि शिवसेना को सदन में बहुमत साबित करने का निष्पक्ष एवं तर्कसंगत अवसर नहीं मिल सके।”

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