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सुप्रीमकोर्ट का आदेश- गिरफ्तार पत्रकार को तुरंत रिहा करे यूपी पुलिस

नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ ट्विटर पर पोस्ट करने के आरोप में यूपी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गए पत्रकार प्रशांत कनौजिया को तुरंत रिहा करने के आदेश जारी किये हैं।

सुप्रीमकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यूपी पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए सवाल उठाया कि प्रशांत कनौजिया को किन धाराओं के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने कहा कि प्रशांत कनौजिया को तुरंत रिहा किया जाए।

इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की भी याद दिलाई। कोर्ट ने कहा कि उसे उदारता दिखाते हुए फ्रीलांस जर्नलिस्ट कनौजिया को रिहा कर देना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि लोगों की आजादी पूरी तरह अक्षुण्ण है और इससे कोई समझौता नहीं किया है। यह संविधान की ओर से दिया गया अधिकार है, जिसका कोई उल्लंघन नहीं कर सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘प्रशांत कनौजिया ने जो शेयर किया और लिखा, इस पर यह कहा जा सकता है कि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। लेकिन, उसे गिरफ्तार किस आधार पर किया गया था?’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आखिर एक ट्वीट के लिए उनको गिरफ्तार किए जाने की क्या जरूरत थी।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की पुलिस ने दिल्ली के शख्स प्रशांत कनौजिया को शनिवार (8 जून) दोपहर को उनके दिल्ली स्थित घर से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार कर प्रशांत कनौजिया को लखनऊ भेजा गया है। प्रशांत पर आरोप है कि उन्होंने ट्विटर पर एक वीडियो अपलोड किया था जिसमें एक महिला खुद को सीए योगी आदित्यनाथ की प्रेमिका बता रही थी। इस वीडियो के साथ उन्होंने योगी का जिक्र करते हुए एक टिप्पणी की थी।

प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी के बाद उनकी पत्नी जिगीषा अरोड़ा ने सोमवार को शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए इस गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। उनकी अर्जी में कहा गया है कि पत्रकार पर लगाई गईं धाराएं जमानती अपराध में आती हैं। ऐसे मामले में कस्टडी में नहीं भेजा जा सकता।

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