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राफेल डील: सुप्रीमकोर्ट में बोली सरकार ‘राफेल डील से जुड़े अहम पेपर हुए चोरी’

नई दिल्ली। राफेल डील को लेकर सुनवाई कर रहे सुप्रीमकोर्ट में आज केंद्र सरकार की तरफ से दलील दी गयी कि राफेल डील से जुड़े सीक्रेट पेपर चोरी हो गए हैं। केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जिन डॉक्यूमेंट को अखबार ने छापा है वह रक्षा मंत्रालय से चोरी हुए थे। हम इसकी आंतरिक जांच कर रहे हैं।

सुनवाई के दौरान राफेल डील पर सुप्रीमकोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने 8 पेज का नोट कोर्ट को दिखाया। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में कोई नया सबूत नहीं लेंगा, जो चीज़ें उपलब्ध हैं उन्हीं पर बात होगी।

प्रशांत भूषण ने कोर्ट ने कहा कि जब प्राथमिकी दायर करने और जांच के लिए याचिका दाखिल की गईं तब राफेल पर महत्वपूर्ण तथ्यों को दबाया गया। कोर्ट ने कहा है कि वह ऐसे किसी भी पूरक हलफनामों अथवा अन्य दस्तावेजों पर गौर नहीं करेगा जो उसके समक्ष दखिल नहीं किए गए हैं।

प्रशांत भूषण ने कोर्ट से कहा कि अगर तथ्यों को दबाया नहीं गया होता तो सुप्रीम कोर्ट ने राफेल सौदा मामले में प्राथमीकि और जांच संबंधी याचिका को खारिज नहीं किया होता।

केंद्र सरकार की तरफ से तर्क देते हुए एटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि राफेल सौदे पर अगर न्यायिक समीक्षा होती है तो भविष्य की खरीद पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि विदेशी कंपनियों को इस बारे में विचार करना पड़ेगा।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अभी हमें संसद, मीडिया और कोर्ट की कार्रवाई को पार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मीडिया की तरफ से कोर्ट को प्रभावित किया जा रहा है।

गौरतलब है कि सुप्रीमकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और वकील एम एल शर्मा ने पुनर्विचार याचिका में अदालत से राफेल आदेश की समीक्षा करने के लिए अपील की है।

अपील में कहा गया कि सरकार ने राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए निर्णय लेने की सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया है। मोदी सरकार ने 3 P यानी Price, Procedure, Partner के चुनाव में गफलत बनाए रखी और अनुचित लाभ लिया है।

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