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मोदी राज में देश के परिवारों पर बढ़ा 4.11 लाख करोड़ का कर्ज: कांग्रेस

नई दिल्ली। देश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था का हवाला देते हुए कांग्रेस ने आज मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में देश के परिवारों पर क़र्ज़ का बोझ और बढ़ गया है।

कांग्रेस नेता अजय माकन ने रिजर्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि बीते पांच सालों में हमारे परिवारों पर करीब 4.11 लाख करोड़ रुपए का कर्ज बढ़ गया है। उन्‍होंने बताया कि रिजर्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में पारिवारिक कर्जों को लेकर महत्‍वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है।

अजय माकन ने आरोप लगाया कि सरकार एलआईसी निधियों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने एसबीआई और आरबीआई रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने आईडीबीआई को उबारने के लिए एलआईसी से 30,000 करोड़ रुपये दिलवाए।

माकन ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि एलआईसी ने आईडीबीआई में 21,000 करोड़ रुपये डालकर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 51 फीसदी की। उन्होंने कहा उसी महीने में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 9,300 करोड़ रुपये और डालने को मंजूरी दी, जबकि आईडीबीआई ने इस साल जून में 3,800 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया था।

उन्होंने कहा कि एलआईसी के 28.84 करोड़ निवेशक हैं और उसकी कुल परिसंपत्ति 31.11 लाख करोड़ रुपये है। माकन ने कहा कि घरेलू दायित्व बढ़कर 7.40 लाख करोड़ रुपये हो गया है जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को सूक्ष्म और वृहद दोनों स्तरों पर प्रबंधित करना होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अर्थव्यवस्था की स्थिति से चिंतित है। देश में मुद्दा अर्थव्यवस्था में मंदी और बेरोजगारी का है।

अजय माकन ने रिजर्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि बीते पांच सालों में हमारे परिवारों पर करीब 4.11 लाख करोड़ रुपए का कर्ज बढ़ गया है। उन्‍होंने बताया कि रिजर्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में पारिवारिक कर्जों को लेकर महत्‍वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2013-14 में यह कर्ज करीब 3.30 लाख करोड़ रुपए था।

अजय माकन ने कहा, 2017-18 में यह कर्ज बढ़कर करीब 7.41 लाख करोड़ पहुंच गया। यानी, केवल पिछले पांच सालों में हमारे परिवारों पर 4.11 लाख करोड़ रुपए का कर्ज बढ़ गया है। अजय माकन ने एलआईसी के 11.94 लाख करोड़ रुपए का निवेश ‘रिस्‍की पब्लिक सेक्‍टर’ में किया था। लेकिन, केवल पांच सालों में यह निवेश बढ़कर करीब 22.64 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

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